हमारी उम्र हुई 60 पर रिटायर नही हुए इच्छाएं खत्म नही और पैसा कहाँ से आये अपना बेटे का घर हो गया अब पोते का हो जाये सब के पास BMW हो जाये। ख़या तब भी इच्छाएं पूरी होगी नही होगी ।
आखिर यह पैसा हम कितना कमाएंगे और बच्चों को कितना करोड़ का मालिक बनाना चाहते है गाड़ी है मकान है शोहरत है आखिर हमारे खाने की प्लेट तो रोज 4 रोटी दाल सब्जी ही है रहेगी फिर बच्चे अरबपति बन जायेंगे सोने के महल में रहेगे पर हमें 80 वर्ष की उम्र में प्लास्टिक की ही प्लेट में रोटी दाल का इंतजार रहेगा।
बस यही 2 रोटी दाल ही जीवन का सार है हमारे पूरे जीवन की कमाई मेहनत लड़ाई का सार अधिक से अधिक पैसा कमाना नही जीवन को जीवन की तरह जीना।
एक किसान जब पूरा दिन हल चला कर रात में टूटी चारपाई पर 4 रोटी सुखी मिर्च की चटनी के साथ खा के थक के चारपाई पर जाता है तो उसे इंद्र से अच्छी नींद आती है उसकी ट्यूबलाइट चंदा की चांदनी उसकी 5 स्टार 2 टन की AC खुला आसमान यकीन करें उसे कब सुबह हुई पता नही चलता हम 40 हजार की पलंग 20 हजार के गद्दे 4 हजार की चद्दर 40 हजार के AC , रूम हीटर और पूरी आधुनिक सुविधाओं के साथ 56 भोग का खाना खा के रात भर करवट बदलते है और जब तक 2 या 4 टैबलेट नही खाते सो नही पाते ।
आखिर सुखी कौन है जाना तो उसी बांस पर सब को है इसलिए उतनी मेहनत करे कि आपका परिवार आपका घर आपके बच्चे आप से सुंदर जी ले उन्हें स्वर्ग देने की लालसा में अपना जीवन बलिदान न करें। अब जीवनसाथी के साथ कुछ साल चैन की नींद ले ले बच्चों के पंख को इतना भी मजबूत न बनाये कि वे उन्मुक्त गगन की इतनी ऊंचाइयों पर उड़ जाए कि नीचे उतरने का रास्ता ही न मिलें। जब उम्र के पादान 85 के ऊपर जाते है तब पैसा नही खाना नही बच्चों का सानिध्य अच्छा लगता है पर वह मिलता जब है हम समंजासय बैठा कर रखते है
यह कहानी बहुत ही गहन और विचारणीय है, जो हमें जीवन के वास्तविक सार के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। इसे जीवन की महत्वाकांक्षाओं, इच्छाओं, और परिवार के प्रति हमारे कर्तव्यों को समझने का एक तरीका कहा जा सकता है।
कहानी यह दर्शाती है कि हम अपनी पूरी जिंदगी धन, शोहरत, और संपत्ति के पीछे भागते रहते हैं, अपने बच्चों को और अधिक समृद्ध और सफल बनाने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन आखिरकार, जीवन का असली सुख केवल बुनियादी चीजों में है - जैसे दो रोटी, दाल, और परिवार का साथ।
कहानी का संदेश यह है कि अधिक धन और विलासिता हमें अंततः वह संतोष नहीं दे सकती जो हम एक साधारण और संतुलित जीवन से प्राप्त कर सकते हैं। किसान की साधारण जीवनशैली और उसकी गहरी नींद इस बात का प्रतीक है कि खुशी और संतोष बाहरी चीजों से नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन और सादगी से आता है।
अंततः, यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि हमारे जीवन का उद्देश्य केवल अधिक पैसा कमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने जीवन को सही मायनों में जीना और अपने परिवार और रिश्तों में संतोष और सुख पाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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