अब इस उम्र में मुझसे नहीं सही जाती ये सारी चौचले बाजी !! सजना संवरना... सत्तर साल की उम्र हो गई है पर क्या मैं.. झूठ बोल रही हूं और श्रीमान जी, आज भी मुझे उसी तरह देखना चाहते हैं जैसे, ब्याह कर लाए थे बुजुर्ग हो गए हैं पर.. शर्म भूल रहे हैं... भला बताओ? नाती पोतों के सामने मैं लाल रंग की साड़ी पहनें कैसी नजर आऊंगी? इस उम्र में हाथों में चूड़ियां पहने ... व्रत रखने के बाद.. हे भगवान! और अब तो व्रत भी रखे नहीं जाते, डॉक्टर ने ही मना कर दिया है सुलोचना जी धीरे से बडबडा रही थी तभी पतिदेव के हंसने की आवाज से वो मुस्कुरा कर वापस बीती यादों में खो गई सच ही तो था, फिर भी वो बहू के साथ सुबह सुबह बैठ जाती थी सरगी खाने!! कि उसे अकेला ना लगे! लाल चुनरिया ओढ़ जब वो सरगी खाती, तो अपने बीते दिन याद आ जाते थे और वहां पर्दे की ओट से आज भी मेरे बूढ़े बुजुर्ग पति... जब मुझे झलक भर देखते तो में चश्मा उचका कर आंखों से और उंगली से दोनों से इशारा कर बैठती !! एक समय था जब हम दोनों साथ में बैठकर सरगी खाया करते थे करवा चौथ बीत गया.. लेकिन कई दिन की थकावट दे गया डॉक्टर ने मना किया था पर उनके मना करने के बा...
इस ब्लॉग पर आप दिल को छु जाने वाली कहानिया पढ़ेंगे