समीरा का जीवन अचानक कठिनाइयों से भर गया था। उसके पति अक्षय की नौकरी छूटने के बाद, घर में जैसे आर्थिक तंगी ने डेरा डाल लिया। अक्षय हर दिन नई नौकरी की तलाश में निकलता, लेकिन बार-बार खाली हाथ लौटता। समीरा देख रही थी कि अक्षय का हौसला धीरे-धीरे टूट रहा है, लेकिन उसने खुद को मजबूत बनाए रखा। एक दिन जब अक्षय थका-हारा घर लौटा, तो उसके चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी। समीरा ने हल्के-से पूछा, “आज कुछ नहीं हुआ?” अक्षय ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “नहीं... लगता है गाढ़े दिन खत्म ही नहीं होंगे। कहीं भी उम्मीद नजर नहीं आ रही।” समीरा ने उसकी तरफ प्यार से देखा और कहा, “गाढ़े दिन हमेशा नहीं रहते अक्षय। ये समय भी बीत जाएगा। रात कितनी भी लंबी हो, सवेरा तो आता ही है।” अक्षय ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ कह नहीं पाया। समीरा ने महसूस किया कि अब उसे कुछ करना होगा। उसने अपने पुराने शौक और हुनर के बारे में सोचा। उसे केक और पेस्ट्री बनाना बहुत पसंद था, और शादी से पहले वह इस कला में अच्छी थी। अगले दिन उसने अपनी सहेली साक्षी से मिलने का फैसल...
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