निशा ने शादी के तीन साल बाद एक बेटे को जन्म दिया।छ महीने बाद उसे पता चला कि उसका बेटा मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है यानी मंगोल है यह सुन उसे बहुत दुख हुआ उसका रो रो कर बहुत बुरा हाल हो रहा था और उसे साथ में बहुत पछतावा भी हो रहा था कि जब उसे तीन महीने की प्रेगनेंसी थी तब ही डॉक्टर के कहे अनुसार टेस्ट करा लिए होते तो उसे आज यह दिन देखना नहीं पड़ता लेकिन सासू मां की जिद ने उसे यह टेस्ट करवाने नहीं दिए कि हमारे टाइम में कौन सा ऐसे टेस्ट होते थे यह सब तो डॉक्टरों के पैसे कमाने के धंधे हैं ऐसा कहकर उसे टेस्ट कराने से रोक दिया था। अब सासू मां को जब इस बात का पता चला कि उनका पोता मंगोल है तो वह अपनी गलती का पश्चाताप करने की वजह झूठ बोलते हुए सारा दोष निशा के ऊपर ही डाल दिया कि तुम ही टेस्ट कराने के लिए तैयार नहीं थी मैंने तो तुम्हें जब भी कहा था कि आजकल बेटा यह सब चीज जरूरी है और तुम डॉक्टर की कहे अनुसार ही चलो पर तुमने मेरी एक ना सुनी। यह सब सुनकर देखकर निशा को बहुत ही पछतावा हो रहा था। वह सासू मां की यह हरकत देख आठ आठ आंसू रो रही थी। उसे कुछ दिन तो लगे यह एक्सेप्ट करने में कि उसका बेटा मांगोल है लेकिन अब उसने ठान लिया था कि वह उसे जीवन में कभी किसी और के ऊपर आश्रित नहीं रहने देगी अब यह उसके जीवन का एक सबसे बड़ा चैलेंज बन गया था जिसमें की उसके सास ससुर ने उसका साथ छोड़ दिया यहां तक की पति ने भी बेटे को पिता वाला प्यार नही दिया लेकिन उसे अपने ऊपर पूरा भरोसा था कि वह उसे एक दिन उसके लायक जरूर बना देगी और उसने पूरी ईमानदारी के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया। उसने उसके साथ दिन रात मेहनत की और देखा कि उसकी किस तरह की फील्ड में रुचि है।
कहते हैं ना कि भगवान एक ना एक खूबी हर व्यक्ति को देकर भेजता है उसने उसकी उसी प्रतिभा को पहचानकर उसे इस लायक बनाया कि जब वह इस दुनिया में ना रहे तब भी वह अपना जीवन अपने बलबूते पर जी संके।
नीरू जैन (दिल्ली)
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