रेणु की शादी हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे उसने अपने स्वभाव से सबका दिल जीत लिया सबकी मदद करना

उसे पसंद था धीरे धीरे घर के सब लोग हर काम मै उसकी राय लेने लगे रेणु के राय के बगैर कोई सामान नही आता ,सास हो ससुर हो या देवर सब रेणु की सलाह लेते घर मैं भी क्या बदलाब लाना सब फैसला रेणु का ही होता जो काम अभी तक घर की बेटी पूजा की ज़िमेदारी थी वो अब रेणु निभा रही थी

वैसे भी पूजा की शादी हो गई थी तो सब फोन पर ही राय लेते थे और जब पूजा आती तो घर की जरूरत का सामान लाती थी क्योंकि मां ज्यादा बाजार जाती नही थी

रेणु की शादी के बाद काफी समय बाद पूजा का मायके आना हुआ उसको पता तो चल गया था की अब सब रेणु से ही सलाह लेते है और रेणु ने घर को बहुत अच्छे से सम्हाल लिया क्योंकि अब उसके पास पूछने के लिए फोन नही आता रेणु को अपनी जगह लेते देख और उसकी तारीफ सुन कर उसकी छाती पर सांप लोटने लगे उसे रेणु से जलन होने लगी

मायके आ कर हर चीज मैं नुक्स निकालने लगी भाभी ये कैसा खाना बनाती हो सबकी सेहत का ध्यान रखा करो

ये कैसा समान लाई हो आपकी पसंद बड़ी बेकार है


रेणु बेचारी चुप रह जाती सोचती की थोड़े दिन के लिए आई है मां पूजा को ही समझाती तो उसे और ज्यादा गुस्सा आता अब वो घर मैं सबको रेणु के खिलाफ भड़काने की कोशिश करने लगी अपनी जलन मैं भूल

गई की वो मायके से ही दूरी बढ़ा रही है


रेणु ने एक दिन अपनी बुराई करते सुन लिया तो उसने अब बात करना ही छोड़ दिया अब वो रेणु का कुछ काम

नहीं करती


मां ने भी गुस्से मै कह दिया की पूजा तुझे इस घर मैं  आना है तो भाभी से निभा कर चलनी होगी वो पराई नहीं इस घर का हिस्सा है और तेरे कारण हमसे भी दूर हो जाएगी


पूजा  गुस्से मै अपनी ससुराल आ गई जलन के कारण अब मायके से दूरी आ गई थी क्योंकि रेणु की अच्छाई

वो सहन नही कर पा रही थी

रिश्तों मैं जलन रिश्तों को जला देती है ये बात ध्यान मैं रखनी चाहिए


स्वरचित

अंजना ठाकुर