अपराजिता का चुनाव सरकारी खर्चे पर विदेश मेडिकल की पढाई के लिए हो गया। अपराजिता की माँ दीवार के टंगे अपने पति की तस्वीर के पास जाकर कहने लगी।
"आज तुम्हारा सपना सच हो गया राजीव। तुम्हारी बेटी अब डाॅक्टर बन जायेगी।" और आँखों से खुशी की अविरल धारा प्रवाहित होने लगी। इधर बैठक में देवरानी की जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी। वह अपनी बेटी नन्दिनी को फटकार लगाए जा रही थी, जो दो साल से मेडिकल की तैयारी कर रही थी। अपराजिता की कामयाबी से उसकी छाती पर साँप लोटने लगा। अब वह अपने पति पर दबाव डालने लगी कि गाँव की जमीन बेच कर बेटी को मेडिकल में दाखिला दिलाएँ।
स्वरचित
पुष्पा पाण्डेय
राँची,झारखंड।
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