"अरी भाग्यवान, ये देखो, फेसबूक पर कौन मिला? स्कूल के जमाने का मेरा लंगोटिया यार मनन।"
"हॅलो मनन, मैं जीवन बोल रहा हूँ। कहाँ रहा यार इतने साल?"
"अरे जीवन, तू? कैसा है? मेरे रिटायरमेंट में एक साल बचा है। दोनों बेटे अपनी अपनी नौकरी पर चले गए। बस यार, कुछ न पूछ, हम दोनों की तो बुरी गुजर रही है।"
"अरे इतना मायूस क्यूँ होता है? बच्चे कब माँ बाप के साथ ताजिंदगी रहते हैं? वैसे दोनों हैं कहाँ?"
"दोनों इंजीनियर हैं, बंगलोर में हैं।"
"और तू कहाँ है?"
मैं अभी अभी ट्रांसफर पर जयपुर आया हूँ।"
"जयपुर, अरे वाह, जयपुर में कहाँ?"
"दुर्गापुरा।"
"मैं तेरे पास ही हूँ, चल मैं और वाइफ दोपहर तेरे घर आते हैं।"
और जीवन पत्नी सहित मनन के घर पहुँच गए थे। करीब तीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दोनों मिल रहे थे।"
"और सुना, मनन, कैसी बीत रही है?"
"अरे भई, बिना बच्चों के घर खाने को दौड़ता है। उनके बिना जिंदगी बेरंग लगती है। और तू अपनी सुना।"
"दोनों बेटियाँ अमेरिका में हाई प्रोफ़ाइल जॉब में हैं। और हम बुड्ढा बुड्ढी यहाँ रिटायरमेंट के बाद जिंदगी भरपूर एंजॉय कर रहे हैं।"
"अरे बिना बच्चों के कैसा एंजॉयमेंट?"
"मैं बताता हूँ, आज टेक्नोलोजी नें इतनी तरक्की कर ली है कि लगता ही नहीं दोनों बेटियाँ सात समंदर पार हैं।"
"हमारी सुबह होती है दोनों से आमने सामने वीडियो कॉल से। यहाँ जब सुबह होती है, वहाँ रात होती है। सो दोनों सोने से पहले आधा आधा घंटा हम दोनों से तसल्ली से बात कर लेती हैं। दिन की शुरुआत में बच्चों से हल्की फुलकी बातें कर हमारा तो दिन बन जाता है।"
"अच्छा?"
"और सैटरडे, संडे को तो दोनों से एक साथ विडियो कोन्फ्रेंस कॉल से जुड़ जाते है'। दोनों से जी भर कर बातचीत करते हैं।"
"फिर दोनों ही हमारा बहुत ध्यान रखती हैं। हफ्ते में एकाध दिन किसी पिक्चर या नाटक की ऑनलाइन टिकिट बुक करवा देती हैं। गाहे बगाहे जायका बदलने के लिए बढ़िया से बढ़िया होटल का हमारा पसंदीदा खाना ऑनलाइन ऑर्डर कर देती हैं। जन्मदिन, ऐनिवरसरी पर फाइव स्टार होटल में ऑनलाइन बुकिंग करवा देती हैं। पूरी जिंदगी घर गृहस्थी, नौकरी, बच्चों की जिम्मेदारियों के चलते घर से निकल ही नहीं पाते थे। घूमना फिरना तो दूर की बात थी। लेकिन अब तो किसी शादी-ब्याह, फंक्शन के बुलावे की देर होती है, बेटियाँ झट बुकिंग करवा देती हैं। अभी न्यू ईयर पर दोनों ने उदयपुर की फ्लाइट और फाइव स्टार होटल की बुकिंग करवा दी थी। साल में एक बार दोनों के पास रह आते हैं। हम तो भई सही मायनों में जिंदगी का लुत्फ उठा रहे हैं।"
"अच्छा, मनन बड़े आश्चर्य से जीवन की बातें सुन रहा था।"
"पिछले दिनों तुम्हारी भाभी को डेंगू हो गया था, दोनों ने घर बैठे शहर के बेहतरीन हॉस्पिटल में रजिस्ट्रेशन करवा दिया। अब बता यार हम कहाँ अकेले हैं?"
"अमां यार, बच्चों को अपने हिस्से की जिंदगी जीने दे। खूबसूरती इस बात में है कि हम उनके पंखों की ताकत बनें न की पांवों की बेड़ियां।"
शायद मनन को भी जीवन की बात समझ आने लगी थी।
-रेणु गुप्ता
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