बड़े नाजो से पाला था खुशबू को उसकी मम्मी पापा ने … अक्सर कहा करते थे वो कि जिस घर जाएगी मेरी बेटी …उस घर को स्वर्ग बना देगी मेरी बेटी ….मगर उन्हें शायद ये पता नहीं था कि हर माँ बाप अपनी बेटी के लिए ऐसा ही सोचते है ….खैर आज नवविवाहिता खुशबू के गृह आगमन की रस्म पूरी हो चुकी थी |
…. रिश्तेदार और मेहमानों के जाने के बाद खुशबू की दोनो शादीशुदा ननद….. खुशबू के पास आकर बैठ गई | कुछ इधर-उधर की बातों के बाद दोनों ननद …खुशबू के घर से आए उपहार स्वरुप दहेज का मुल्य तय करने लगी |……थोडी देर बाद बडी ननद ने खुशबू को समझाते हुए …और अपने बड़े होने का कर्तव्य निभाते हुए बोली…..
“खुशबू ,अपने माता-पिता और पति के माता-पिता मे कोई फर्क नही होता | दोनो के माता-पिता भगवान तुल्य होते है | पति के माता-पिता का स्थान उच्च होता है क्युकि हमे पति उनसे ही मिलता है जो सारा जीवन हमारा ख्याल रखता है| उनके आदर सत्कार से, सेवा करने से हमारा चन्द्रग्रह मजबुत होता है और इससे हम बुद्धिमान , धनवान ,सफल और यशस्वी होते है | यही वह पुण्य है जो हमे हर सुख सुविधा देता है और उनका अपमान करने से दुख पहूँचाने से हम गरीब भाग्यहीन , यहाँ तक की पागल भी हो सकते हैं | “
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बडी बहन थक गई…… तो छोटी बहन ने समझाना शुरू किया , “अम्मा बाबुजी तुम्हारे साथ ही रहेंगे | उनका आदर-सत्कार खान-पान ठीक से करना| बडी दीदी के बातो को हमेशा ध्यान मे रखना | उन्हे कभी भी किसी तरह से दुख मत पहूँचाना ‘…. खुशबू ….सास -ससुर की सेवा मतलब गुरूजन और भगवान की पूजा ‘ ~ यह हमेशा याद रखना|”
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अभी अभी ससुराल मे पैर रखने वाली खुशबू अपने भाग्य पर इतरा पडी|….. कितना अच्छा परिवार मिला है मुझे और कितनी समझदार ननदें मिली है मुझे |सच में ये दोनो जिस घर की बहु होगी वहां तो सब कितने खुश होंगे……..
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रात बीती सुबह हुई…….बडी ननद अपनी अम्मा से अपने ससुराल की बातें कह रही थी – ” मेरी सास छोटी – छोटी बीमारी मे अस्पताल मे भर्ती हो जाती है | उनका सेवा कर , मै मरूँ क्या ! अपने बच्चे -पति के खाने – पीने पर ध्यान दूँ या उन पर ? इसलिए उसी शहर मे अलग घर लेकर शांति से रहती हूँ |”……खुशबू …….. रात वाली और अभी वाली ननद मे असली चेहरा तय नही कर पा रही थी |
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खैर खुशबू ….. पति और सास -ससुर समेत अपने घर में …..गृहस्थी सजाने लगी| अपना दिनचर्या छोड़ घर में सबको खुश रखकर चँद्र ग्रह को सवारने लगी|……और …एक दिन सुबह सुबह छोटी ननद आई| तमतमाया हुआ उनका चेहरा देखकर अम्मा ने पुछा , “क्या हुआ?” |………. ” क्या हुआ !! पागल हो गई हूँ | एक सप्ताह से बूढ़ा -बूढी आये हुए है मेरे पास …… काम कर-कर के थक गई हूँ ……कभी गीला कपडा उतारकर तह कर देते है तो कभी बच्चो को कहानिया सुनाने बैठ जाते है | पता नही कब जाएगे दोनो !! “……….खुशबू उनकी आगे की बाते सुन नहीं सकती थी इसलिए वहाँ से चली गयी ….शायद सास -ससुर की बुराई सुनने के संस्कार खुशबू को दिए नहीं गए थे |
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क्या बहुऐं मायके से यह सब सीख के आती हैं ,….या उन्हें ससुराल मे यह सब सिखाया जाता है ? “
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पर खुशबू अगर यह सवाल ननदो से करती, ……तो चँद्रग्रह का तो पता नही….घर का माहौल ज़रूर खराब हो जाता……… इसलिए मन-ही-मन उत्तर ढूँढ़ने कि कोशिश करने लगी…..
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