Priyanka Mukesh Patel
इस ब्लॉग पर आप दिल को छु जाने वाली कहानिया पढ़ेंगे
शाम की हल्की गुलाबी ठंडक शहर के उस मशहूर पार्क में उतर आई थी। अपनी उंगलियों में पांच साल के आरव की नन्ही और कोमल उंगल…
बारिश के बाद की वो धुली-धुली सी सुबह थी। आंगण में लगे नीम के पेड़ से पानी की बूंदें टपक रही थीं। मीनल कई महीनों बाद अ…
दिसंबर का महीना अपने चरम पर था और शहर में ठंडी बर्फीली हवाएं किसी नुकीले तीर की तरह जिस्म के आर-पार हो रही थीं। शाम ग…
रात का सन्नाटा गहराने लगा था। घर के बाकी कमरों की बत्तियां बुझ चुकी थीं, लेकिन रमाकांत जी के कमरे में अभी भी एक छोटा सा…
रोहन जब इस दुनिया में आया था, तो उसके माता-पिता की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। चांद से रोशन चेहरे और बड़ी-बड़ी कजरारी…
सर्दियों की एक सर्द सुबह थी। घर के पिछले हिस्से में बैठकर बर्तन मांजती हुई सावित्री के हाथ तो मशीन की तरह चल रहे थे, …
श्वेता अपने बेडरूम की खिड़की के पास खड़ी बाहर की तेज़ बारिश को देख रही थी, लेकिन उसके मन के भीतर इससे भी बड़ा तूफान च…
अस्पताल से घर तक का वो आधे घंटे का सफर देविका को किसी अंतहीन और भयानक सज़ा की तरह लग रहा था। कार की पिछली सीट पर बैठी…
कमरे की दीवारें हल्के गुलाबी और नीले रंगों से सजी थीं। खिड़की से छनकर आती सुबह की धूप उस छोटे से पालने पर पड़ रही थी,…
*शादी से पहले हर लड़की सपनें बुनती है कि बड़े शहर में पति के साथ आज़ादी की ज़िंदगी जिएगी, पर क्या होता है जब उसी पति …
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