माँ का आंचल

 नीता अपनी गाडी से ऑफिस के लिए निकली थी पर थोड़ा दूर जाने पर ही उसे जाम दिखाई दिया । यहाँ इस सडक पर कभी जाम लगता नही था पर आज इतना लम्बा जाम देख नीता हैरान रह गई । उसने अपनी गाडी से निकल कर देखा सिर्फ गाड़ियों का रेला ही नही उससे आगे भीड़ का भी रेला है वो वजह जानने के लिए गाड़ियों की भीड़ से निकल लोगो की भीड़ तक पहुंची ।

भीड़ को चीरती हुई जैसे ही वो आगे पहुंची उसने एक नवजात शिशु को किसी कपड़े मे लिपटे देखा जिसके चेहरे और हाथों पर खरोचे लगी थी शायद किसी कुत्ते ने उसे घसीटने की कोशिश की थी।

बच्चे को देख उसके मन मे जहाँ ममता उभरी वही उसके माँ बाप का सोचकर नीता का मन गुस्से से भर गया। कैसे लोग है जो खुद गुनाह करते है और सजा मासूम बच्चो को देते है उन्हे मरने को छोड़ कर । क्या ऐसे लोग इन नवजात बच्चो को सड़े हुए गाजर मूली की तरह समझते है ? उसके मन से आवाज़ आई और आँखों से आँसू बहने लगे ।

आठ साल से बच्चा ना होने का दुख झेलती नीता ने झट से बच्चे को गोद मे उठा लिया और सीने से लगा लिया उस पल ऐसा लगा मानो बच्चे को तरसती एक स्त्री को तृप्ति मिली हो ।

कथा कुंज साहित्य और Betiyan.in के लिए ।

तभी वहाँ पुलिस आई जिसे किसी जिम्मेदार नागरिक ने फोन किया था । बच्चे को अस्पताल भरती कराया गया । नीता अपनी गाडी मे बैठ अस्पताल पहुंची । बच्चे को ज्यादा चोट नही आई थी ये जान उसे संतोष सा हुआ। दो दिन तक वो रोज अस्पताल आती रही तीसरे दिन बच्चे को छुट्टी मिली तब उसने पुलिस से कुछ बात की और बच्चे को अपने आँचल मे समेंट लिया। असल मे वो उस बच्चे को गोद लेने को तैयार थी पर उसके लिए उसे सब्र रखना था पर ममता कहा सब्र रखती है इसलिए पुलिस वालों से उसने विनती की कि जब तक सारी कार्यवाही पूरी ना हो बच्चे को उसके पास रहने दिया जाये। कुछ दिनों तक पुलिस से छानबीन् की फिर बच्चा नीता को गोद दे दिया गया क्योकि उसके माता पिता को तो वैसे भी जरूरत नही थी उसकी।

इस घटना ने नीता के मन को इतना झकझोर दिया कि उसने अपने पति की मदद से एक छोटा सा अनाथ आश्रम खोलने की सोची जिसमे वो ऐसे बच्चो को संरक्षण दे सके । उसने वहाँ के विधायक की मदद से इस काम को अंजाम पर पहुंचाया । अपने घर के बाहर तख्ती लगाई " माँ का आंचल " और जगह जगह पोस्टर लगा दिये।

" बच्चे ईश्वर की नेमत है इन्हे सड़े हुए गाजर मूली की तरह सड़को पर मत फेंकिये हमें दीजिये हम उन बच्चो को बेहतर भविष्य देंगे " साथ मे उसका पता और फोन नंबर था ।

कल तक बच्चे को तरसती नीता के पास छह बच्चे है । एक वो माएं है जिन्होंने बच्चो को जन्म दिया पर प्यार ना दे सकी एक ये माँ है जो बिना जन्म दिये ममता लुटा रही है ।

संगीता अग्रवाल


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