तीज की साड़ी

 " जतिन, मुझे शापिंग करने जाना है कुछ पैसे दे देना। इस बार तीज पर मेरी सारी सहेलियां हरी साड़ी पहनेंगी तो मुझे भी एक अच्छी साड़ी लानी है" मचलते हुए वाणी बोली।

" क्या कहा तुमने.... तीज आने वाली है!! तो इस बार दीदी के यहां सिंधारा नहीं भेजा तुमने। मां तो हमेशा भेजती थी। सावन आते हीं मुझे बोलने लगती थी कि ममता के यहां कब जाएगा सिंधारा लेकर।" जतिन ने थोड़ा बेचैन होते हुए वाणी से पूछा।

" ओह!! वो... दीदी के बारे में याद हीं नहीं रहा। हमेशा मम्मी जी भेज देती थीं ...... इस बार मम्मी जी तो हैं नहीं और मेरा ध्यान हीं नहीं गया"

वाणी ने ये बात बहुत सहजता से कह दी लेकिन मां के ना होने की बात पर जतिन के चेहरे पर एक दर्द उभर आया। इस साल मां का ना होना जतिन और उसकी बहन ममता दोनों को अखर रहा था लेकिन वाणी को तो जैसे आजादी मिल गई थी।

सच में वाणी ने कभी अपने ससुराल के रिश्तों को तवज्जो नहीं दिया। एक हीं ननद थी उसकी। बहुत हीं सरल स्वभाव की। लेकिन जीजा जी एक साधारण सी नौकरी करते थे । बच्चों और सास ससुर के साथ मुश्किल से गुजारा होता है इसलिए हाथ थोड़ा तंग रहता था।

शायद इसी कारण से वाणी हमेशा अपनी ननद ममता से कटी कटी रहती थी। केवल पति के सामने दिखाने को प्यार से बातें करती नहीं तो कभी हाल चाल भी नहीं पूछती थी। पिछले साल सास के देहांत के बाद तो उसने यही मान लिया था कि अब ये औपचारिकता निभाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी लेकिन जतिन अपनी बहन से बहुत प्यार करता था।

ननद के यहां सिंधारा भेजने का वाणी का मन तो नहीं था लेकिन जतिन बोला, " सुनो , तुम अपने लिए साड़ी लाओ तो दीदी के लिए भी एक अच्छी साड़ी लेती आना । उन्हें खुशी होगी कि मां के बाद भी पीहर का सगुण बना हुआ है। ,,

जतिन कि बात सुनकर वाणी ने हां में गर्दन हिला दी लेकिन उसका मन कड़वा हो गया था । भुनभुनाती हुई वो रसोई की तरफ बढ़ गई ," अब उनके लिए भी नई साड़ी लाओ..… मेरी खुशी तो किसी से देखी हीं नहीं जाती। ,,

जतिन अपनी पत्नी के व्यवहार से वाकिफ था लेकिन सोचता था कि शायद कभी तो उसे रिश्तों की कद्र जरूर होगी ।

ननद के लिए अपने जैसी नई साड़ी तो वो लाने से रही लेकिन जतिन ने कह दिया तो कुछ तो भेजना हीं था सिंधारे के नाम पर। उसने अपनी संदूक खोली कि कहीं कुछ मिल जाए तो ननद के यहां भेज दे।

दूसरे दिन उसने खुश होते हुए एक साड़ी पैक करके जतिन को देते हुए कहा, " सुनिए, दीदी के लिए मैं ये साड़ी लेकर लाई हूं। बहुत सुंदर है मेरी साड़ी से भी अच्छी। बिल्कुल आजकल के फैशन की। पसंद तो मैंने अपने लिए ही की थी लेकिन दुकानदार के पास ये एक हीं साड़ी थी तो मैंने सोचा दीदी के लिए हीं ले लेती हूं। मेरा क्या है मैं तो फिर भी ले लूंगी। आप दीदी से कहना कि ये साड़ी जरूर पहने...."

ननद के लिए इतना प्यार उमड़ते देख जतिन को आश्चर्य हो रहा था । साथ ही थोड़ा शक भी।

खैर जतिन साड़ी लेकर बहन के घर चल पड़ा। रास्ते में उसने अपनी बहन और बच्चों की मनपसंद मिठाई और चाकलेट भी ले ली। बस में बैठने के बाद उसके मन में पता नहीं क्या आया कि वो वाणी की दी हुई साड़ी को खोलकर देखने लगा। साड़ी को देखते हीं वो गुस्से से भर गया। वो साड़ी बहुत हीं हल्की थी। उसपर लगी लैस भी जगह जगह से उखड़ी हुई थी।

वो उसी समय बस से उतरा और बाजार से एक नई साड़ी लेकर अपनी बहन के यहां चला गया। ममता भाई को आया देखकर बहुत खुश हुई। मां को याद करके दोनों भाई बहन भावुक हो गए फिर एक दूसरे को दिलासा भी दी।

कुछ देर ठहरने के बाद जतिन वापस घर लौट आया। उसके हाथ में थैला देखकर वाणी ने जिज्ञासा से पूछा, " जतिन इस थैले में क्या है ?"

जतिन थैले से वो साड़ी निकालकर नकली खुशी दिखाते हुए बोला ," वाणी, जब मैंने दीदी से कहा कि ये साड़ी तुम्हें बहुत पसंद थी तो दीदी ने ये साड़ी वापस मुझे हीं दे दी और कहा कि भाभी का जन्मदिन भी आने वाला है तो ये साड़ी तुम मेरी तरफ से तोहफा समझकर भाभी को हीं दे देना। और हां दीदी ने ये भी कहा है कि भाभी से कहना ये साड़ी जरूर पहने और मेरे पास फोटो भी भेजेx ।"

जतिन की बात सुनकर वाणी का गला मानो सूख गया। उसके मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही थी। उसकी हालत देखकर जतिन ने फिर चुटकी ली ," चलो चलों ... वाणी जल्दी से ये साड़ी पहनकर मुझे भी तो दिखाओ कि तुमपे ये कैसी लगती है !!"

" वो..…. मैं..... बाद में ..... ,, वाणी हकलाते हुए बोली।

" क्यों वाणी? बाद में क्यों!! तुम्हारी तो ये मनपसंद साड़ी है ना ?? ,, इस बार जतिन कि आवाज में रोष था।

पति के सामने पोल खुलने के भय से वाणी की आंखें डबडबा आईं । वो गर्दन झुकाते हुए बोली, " मुझे माफ कर दो जतिन..... मैं हीं स्वार्थी हो गई थी। मैं भूल गईं थीं कि बहन का हक हमेशा अपने मायके पर रहता है। लेकिन मैं कसम खाती हूं कि आगे कभी ऐसी गलती नहीं करूंगी।"

वाणी के पश्चाताप को देखकर जतिन को थोड़ी तसल्ली हुई कि शायद अब उसकी पत्नी रिश्तों का मान बनाए रखेगी।

दोस्तों, आशा करती हूं आपको ये कहानी पसंद आएगी। कोई त्रुटी हो तो क्षमा प्रार्थी हूं ।

आपकी प्रतिक्रिया के इन्तजार में आपकी सखी ...

सविता गोयल


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