3 साल पहले की बात है . मुझे पेपर पढ़े बिना चाय पीने का मजा नहीं आता । यह मेरी वर्षों पुरानी आदत है पूरा पेपर पढ़ने के बाद ही घर के काम करना शुरू करती हूँ।जैसे ही 8 बजे, मैंने चाय बनाई और कप में छानते ही डोरबैल बजी। पेपर गेट पर लगा था। ।
चाय में शुगर फ्री डाली और चमच्च से चलाते हुए एक शिप मारी पेपर खोलकर पढ़ने लगी। रोज की तरह कही प्रार्टियों की एक -दूसरे के प्रति छींटाकशी ,मारधाड़ , रेप और छिनतई के साथ ,साइबर क्राइम और फ्रॉड की आम खबरों को पढ़ने के बाद मेरी नजर एक आम हेडलाइन पर पड़ी --- ''पत्नी की हत्या कर शव कुएं में फेंका ,किया आत्मसमर्पण।। '
मैं न्यूज को ध्यान से पढ़ने लगी -अपनी पत्नी की हत्या कर उसे कुएं में दफना दिया। इसके बाद उसने आत्मसमर्पण कर दिया। मृतक पत्नी का नाम नूतन कुंडू और आरोपी पति का नाम रवि कुंडू । ये लोग लिलुआ स्थित रेलवे कॉलोनी में एक झोपडी में रहते है। मैं चिहुँक गई अरे !यह 2 महीने से मेरे घर काम करने वाली नूतन के बारे में लिखा हैं.!-आगे बेसब्रीसे पढ़ने लगी - नूतन का उसके पति के साथ विवाद हुआ ग़ुस्से में आकर पति ने हथोड़े से नूतन के सिर पर वार किया और सिर से खून बहा और मौत हो गई। पति ने उसे कुएं में डाल दिया और एक नमक की बोरी भी डाल दी। यह घटना उसी दिन शाम की थी। जिस सुबह मेरी नूतन से आखिरी बार बात हुई थीं । क्योंकि वह तीन दिन से नहीं आ रही थी,.. उसने कहा --'भाभी! आप कोई दूसरी कामवाली रख लो। मैं अब कारखाने में काम करुँगी। ' और
उसी रात .. उसे बेदर्दी से मार डाला उसके दरिंदे पति ने। शराब के नशे में उसके पति ने अपने दोस्त को यह बात बताई और उसने पुलिस को जाकर बता दी उसके बाद पुलिस की करवाई से नूतन की नमक के कारण गली-हुई बॉडी निकाली गई और पति को गिरफ्तार कर लिया। उसकी 4 साल की बच्ची जो अनाथ हो गई थी । दादा -दादी उसे गांव ले गए। उसकी 6 साल की बड़ी बहन पहले से ही उनके साथ रह रही थी।
यह सारे समाचार पढ़ते ही मेरे रोगंटे खड़े हो गए। आँखों के सामने नूतन का चेहरा घूमने लगा। वह 22 -23 वर्ष की सावलें रंग की , चेहरे पर लुनाई लिए , साढ़े 5 फुट की एक दम दुबलीपतली छरहरी सुंदरऔर तीखे नैन -नक्श ।वाली बड़ी जिंदादिल लड़की थी। , बोलती सी बड़ी-बड़ी आखें ,उस पर लम्बे घने -काले लहराते घुंघराले केश .! कोई बंगाली की फिल्म की नायिका सी लगती। थी .अजीब सा आकर्षण था उसके व्यक्तित्व में.. बहुत ही हंसमुख और बिंदास। . उदास तो देखा ही नहीं । जिंदादिली से भरपूर थी .वह काम पर अपनी 4 साल की बेटी को लेकर आती थी उसे कभी कचोरी सब्जी या केक जो बाजार से खरीदकर लाती थी देकर बैठा देती। . फिर काम पर लग जाती। हर दो -एक दिन छोड़कर उसके चेहरे ,शरीर पर चोट के निशान मिलते। जो उसके पति द्वारा बेदर्दी से पीटे जाने की गवाही देते। जिसे यह कहकर छुपाने का प्रयास करती कि वो गिर गई थी । उसकी ऐसी हालत देखकर मै हतप्रभ रह जाती . .. उसका सलोना चेहरा बुरी तरह फूला हुआ होता,, बायीं आँख सूजी हुई , उसके नीचे गहरे लाल --नीले -स्याह निशान पड़े होते । वह घर से 7 बजे काम पर निकलती थी और मेरे घर 10 बजे आती तो उसे पहले चाय नाश्ता देने पर वह बोलती -भाभी आप तो आते ही चाय नाश्ता , खाना दे देते हों जबकि बाकि नाम के बड़े घरों में केवल काम करवा लेते हैं कुछ खाने को नहीं देते हैं तो कुछ खरीदकर बच्ची को खिलाती हूँ उसे कैसे भूखा रखूं ? पानी बोतल में में रखती। हूँ .मेरे घर में वीणा नाम की एक ओर लड़की भी काम करती है। सबके खाने के बाद अगर वह उसकी बच्ची को झूठे बर्तन माँ को देने को कहती तो वो भड़क जाती। '-दीदी -मेरी बच्ची को कुछ करने करने मत बोलिए ।' उसे तो मैं आपकी तरह पढ़ा -लिखा कर बड़ी दीदीमुनि (टीचर ) बनाउंगी। वो भी आपकी तरह कुर्सी पर बैठकर कम्प्यूटर में लिखेगी और पढ़ेगी। काम करके बचत किये पैसे से बैंक में खाता खोलूँगी।
उसका बचपन भी बहुत अभाव भरा था। उसकी माँ घरो में काम करती थी। 5 साल की उम्र से वो काम करने लगी.पिता रिकशा चलाते हैं।जो उसे प्यार करते थे कभी कभीआइसक्रीम और चॉकलेट लाकर देते थे। अगर वो कभी अपने समवयस्क लड़कियों के साथ कभी खेलने की जिद करती उसकी माँ उसे बहुत मारती थी। मात्र 14 साल की उम्र में उससे दुगने उम्र के व्यक्ति के साथ जबरदस्ती शादी करवा दी जो एक नंबर का अय्याश ,शक्की और बात -२ पर उसको मारता पीटता था । गंजी कारखाने में काम करता ।। उसे नूतन का आदमी तो छोड़ किसी महिला से भी बात करना पसंद नहीं था। इसलिए वह एक दिन भागकर मायके आ गई तो उसकी माँ ने उसकी ही गलती बताकर बहुत बुरा -भला कहा और दो थप्पड़ मारकर वापस भेज दिया।
आश्चर्य की बात है कि एक कुंवारी लड़की मायके रह सकती है विवाहित लड़की का पति से लड़कर आने पर एक रात भी मायके में रहना उचित नहीं मानते ! अजीब सी बात है इस पुरुष प्रधान समाज की !मायके में लड़की को पराया धन मानकर उसे सारे संस्कारो की मानने की दुहाई देते हैं और बहु बनने पर ससुराल में 'पराये घर से आई है ' कहकर ताना मारते है। आखिर लड़की का वास्तविक घर कौन -सा है ?
उसको दूसरी बेटी हुई तो पहली बेटी को उसके सास -ससुर आकर ले गए। कारखाना बंद होने से पति का काम छूट गया तब नूतन के पिता ने उसे अपने यहां बुलाकर एक खोली भाड़े पर दिलवा दी। ।अब उसका पति भी रिकशा चलाता है और और वह घरों में काम करती हैं । यहीं उसका जन्म हुआ यही पली -बढ़ी तो सब उसको जानते थे। जब उसे मार पड़ती थी तो लोगों के शर्म से घर से नहीं निकलती थी दो दिन बाद निकलने पर भी जान -पहचान के लोग पूछ ही लेते थे और उसे जवाब देना ही पड़ता जो उसके पति को फिर उस पर हाथ उठाने का मौका मिल जाता वो जो कमाती थी सब छीन लेता था।उधार लेकर बच्ची ले लिए कुछ खरीदती थी। 4 बजे तक घर पहुंचना जरूरी है, देरी होने पर धुलाई होती थी। उसने अपनी बच्चियों के भविष्य का सोचकर एक नया काम पकड़ा था। ताकि उस तनखाह के पैसे बैंक में खाता खुलवाकर डाल सके।
,एक दिन वह शूट पहनकर आई ,तो मैंऔर वीणा बोली --'आज शूट पहनी है अच्छी लग रही हैं। '
' मजबूरी में बहन का पहनकर आई हूं।' कल रात उसके पति ने उसके सारे कपड़े जला दिए और उसे भी मारा। क्योंकि उसे बताये बिना काम क्यों पकड़ा ? उसने अपने हाथ और पाँव की चोटें दिखाई।
अरे नूतन !ऐसे तो किसी दिन तुम्हारा पति तुमको मार देगा ? हमलोगों को तेरे मरने की खबर पेपर से मिलेगी। 'जितना जल्दी हो उससे अलग हो जा शांति से कमा और खा। '
नहीं भाभी !मैं ऐसा नहीं कर सकती। सिर पर पति का हाथ है तो कोई आंख उठाकर नहीं देखता। नहीं तो अकेली औरत का जीना दूभर हो जाता है । '
मैं निशब्द थी !मुझे क्या पता था कि सचमुच उसके साथ ऐसी दर्दनाक त्रासदी होगी ?। ऐसी जिंदादिल लड़की का ऐसा दुख़द अंत ?.
अन्जु सिंगड़ोदिया
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