जाहिल

 " ऋतु तुमने फिर से बाथरूम का नल खुला छोड़ रखा है देखो कितना पानी बेकार हो गया !" निशांत अपनी पत्नी से बोला ।

" अरे तो क्या हुआ थोड़ा पानी बेकार हो गया तो बिल तो देते है हम । मैं बस नहाने जा रही थी कि कॉल आ गई और पता ही नही लगा कब आधा घंटा बीत गया !" मुस्कुराते हुए ऋतु बोली और नहाने चली गई । निशांत जो पत्नी की लापरवाही से परेशान था अपना गुस्सा पीकर रह गया।

" ऋतु ये सारी लाइटें क्यो जला रखी है तुमने तुमसे कितनी बार कहा है जरूरत हो तभी लाइट जलाया करो !" शाम को निशांत ऑफिस से आकर बोला।

" मैने भी तो तुमसे कितनी बार कहा है मुझे पूरा घर जगमगाता हुआ पसंद है अब इतनी सारी लाइट जलाने को ही तो लगी है ना । कंजूसी की भी हद है आपकी !" ऋतु गुस्से मे बोली हमेशा की तरह फिर निशांत गुस्सा पीकर रह गया।

अगले दिन छुट्टी थी इसलिए निशांत अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घूमने जा रहा था ऋतु ने बेटे को चिप्स खिला गाडी का शीशा खोल खाली पैकेट सडक पर फेंक दिया ।

" ऋतु गाडी मे डस्टबिन है फिर कूड़ा बाहर क्यो फेंक रही हो तुम ?" निशांत एक दम से बोला।

" अरे क्या फर्क पड़ता है पहले भी तो इतना कूड़ा पड़ा है ना आप भी बेवजह का भाषण झाड़ने लगते है चलिए वो सामने के शोरूम से मुझे साड़ी लेनी है !" ऋतु के ये बोलते ही निशांत फिर एक बार गुस्सा पी गया और गाड़ी रोक दी। ऋतु ने जैसे ही बाहर पैर रखा उसका पैर पास की भरी हुई नाली से बहते पानी पर पड़ा।

" छी...सारे कपड़े गन्दे हो गये मेरे पता नही हमारे देश मे कैसे कैसे जाहिल लोग भरे है जो नालियों मे कचरा फेंक देते है । जरा सभ्यता नही लोगो मे !" ऋतु गुस्से से चिल्लाई।

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" ऋतु उन जाहिल लोगो मे तुम भी तो शामिल हो !" मुस्कुराता हुआ निशांत गाड़ी से उतरते हुए बोला।

" क्या बकवास कर रहे है आप !" निशांत की बात सुन ऋतु का गुस्सा और बढ़ गया।

" क्यो अभी कुछ देर पहले तुमने भी तो चिप्स का पैकेट सड़क पर फेंका वो पैकेट हवा से उड़कर ऐसे ही तो नाली मे जायेगा । जैसे तुमने किया वैसे ही और लोग करते है तो सभी असभ्य लोग हुए ना !" निशांत बोला।

" पर मैने तो एक ही पैकेट फेंका था बस !" ऋतु धीमी आवाज़ मे बोली।

" अगर सभी एक एक पैकेट फेंके तो सोचो कितने पैकेट हो जाएगे । दूसरों को कहना आसान है पर जब तुम खुद ऐसा ही करती हो तो ।" निशांत बोला । निशांत की बात सुन ऋतु सोचने पर मजबूर हो गई ।

क्योकि ऋतु के कपड़े खराब हो गये थे तो उसने घूमने का विचार त्याग दिया और निशांत से वापिस चलने को कहा । पर हाँ गाड़ी मे बैठने से पहले उसने अपना फेंका चिप्स का पैकेट उठा पास के कूड़ेदान मे डाल दिया जिसे देख निशांत मुस्कुरा दिया। गाड़ी मे बैठ निशांत ने लोहा गर्म देख पानी और बिजली की एहमियत भी ऋतु को समझाई जिसके बाद ऋतु काफी हद तक सुधर गई।

संगीता अग्रवाल


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