"सीमा, सिया को भर-भरकर सामान देना, गहने-कपड़े में कोई कमी मत रखना। ऐसा न हों कि तेरी आदर्शवादिता के चक्कर में बेटी को ससुराल में सुनना पड़े। "कामिनी ने देवरानी से कहा दरअसल सीमा शादी होकर आई थी तो कुछ खास सामान नहीं लाई थी परंतु थोड़े ही दिनों में अच्छे व्यवहार से सबका दिल जीत लिया था। सास भी उसे मानती थीं। उनके सामने तो कामिनी सुना नहीं पाई थी, सास के न रहने पर बोलने का मौका मिलते ही ताना मार दिया।
सीमा बोली, "भाभीजी, सही कहा आपने। हम भर-भरकर सिया को संस्कार रुपी गहने देकर विदा कर रहे हैं।"
कामिनी का मुंह देखते ही बनता था।
- प्रियंका सक्सेना
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