मां ये इतना सब सामान आप क्यों रख रही हैं अरे आज कोई रस्म नहीं होनी है बस खाना खाने जाना है रीति ने हंसकर कहा तो मां सुनंदा मुस्कुरा पड़ीं।
हां बेटा पर अब हम लड़की वाले हो गए हैं उस घर में तेरा रिश्ता होने वाला है खाली हाथ कैसे जायेंगे।
क्या मां आप भी दकियानूसी बातें लेकर बैठ गईं।कल जब वे सब हमारे घर रस्म करने आए थे तब आपने इतना सब दिया तो था फिर आज फिर से क्या जरूरत है।लड़की वाले हैं तो क्या निभाने की जवाबदारी सिर्फ हमारी है!!ये सब कुछ नही जायेगा मां....बस आप बढ़िया वाली साड़ी पहन कर तैयार हो जाइए रीति ने कह तो दिया पर सुनंदा कहां मानने वाली थी।
अपनी होने वाले समधी समधन के लिए साड़ी और पैंट शर्ट लड़के के लिए शर्ट और खूब सारी मिठाइयां मेवे फल सब रख लिया उन्होंने आखिर पहली बार उनके घर जा रहे हैं।ठीक है उन लोगों ने खाने पर बुलाया है लेकिन अब रिश्ता जुड़ने वाला है वो भी इतना नाजुक हमारी बेटी की ससुराल है इतना करना तो हमारा धर्म बनता है... सारे पैकेट्स बड़ी गाड़ी में रखवाते हुए सुनंदा थोड़ी चिंतित भी थी कोई कमी तो नहीं रह गई है!!
लेकिन रीति ने देखते ही सारा सामान निकलवा दिया या तो ये सारा सामान जायेगा या मैं !!उसकी जिद के आगे घुटने टेकने पड़ गए सुनंदा जी को।बड़ी मिन्नतों के बाद मिठाई बस ले जाने को तैयार हुई।
पूरे भोजन के दौरान सुनंदा जी बहुत सतर्क थी संभल कर बात कर रही थीं थोड़ा थोड़ा खा रही थीं।मेरी लड़की इसी घर में आयेगी किसी को कोई बात बुरी ना लग जाए चिंता भीतर ही भीतर खाए जा रही थी उन्हें बताओ खाली हाथ आ गए!!
भोजन के बाद वापसी हो रही थी।
ये क्या !! नहीं नहीं ये उल्टा रिवाज ना करिए अरे हम लड़की वाले हैं भला आप लड़के वालों से कुछ कैसे ले सकते हैं.. सुनादा जी समधन द्वारा दी जा रही साड़ी के पैकेट देख कर बौखला गईं!! देने का धर्म हमारा बनता है आपका नहीं विनीत स्वर में बोल उठीं।
अच्छा और हमारा लेने का ही धर्म बनता है क्या!! देखिए सुनंदा जी ये लड़के वाले और लड़की वाले की मानसिकता से रिश्ते जिंदगी भर नही निभाए जा सकते ।#ताली एक हाथ से नहीं बजती है सुनंदा जी उस दिन हम आपके घर आए थे आपने जो भी दिया उसमे आपका प्यार था हमने सिर आंखों पर लिया आज आप हमारे घर आईं है थोड़ा सा प्यार हमारा भी स्वीकार करने का अवसर दीजिए अगर आपकी लड़की हमारे घर आयेगी तो हमारा लड़का भी तो आपके घर जायेगा सम्मान और हैसियत हम दोनों की बराबर है... सामान नहीं सम्मान रिश्तों को मजबूत बनाता है...बहुत स्नेह से उपहार थमाते हुए शांता जी ने कहा तो सुनंदा जी लाजवाब हो गई संतोष और खुशी से उनकी आंखें भर आई..!!
एक हाथ से ताली नहीं बजती#लघुकथा
लतिका श्रीवास्तव
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