मर्यादा

 निशा दम्पत्ति में किसी बात पर जोर-जोर से झगड़ा हो रहा था। अचानक से निशा के पति विमल ने उस पर हाथ उठा दिया।

झट से विमल का हाथ पकड़ते हुए निशा ने कहा -" पतिदेव! मर्यादा में रहना सीखो। मैं कोई गँवार, अनपढ़ नारी नहीं हूँ कि तुमसे पीटती रहूँ और खामोश रहूँ। मेरा भी अपना वजूद है। अगर तुमने पति की मर्यादा तोड़ी, तो मैं भी तुझ पर हाथ उठाने से बाज नहीं आऊँगी। बेहतर होगा कि दोनों रिश्तों की मर्यादा का सम्मान करें।"

पत्नी के बदले हुए तेवर देखकर विमल सोचने लगा कि सचमुच नारियां बदल रहीं हैं!

समाप्त।

बोडिया Lin

लेखिका डॉक्टर संजु झा (स्वरचित)


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