अब कोई माफ़ी नहीं

 " यार माफ़ भी कर दो.. अब ऐसा कभी नहीं होगा। तुम्हारी कस..।"

" मत खाओ मेरी झूठी कसम!" विनीता लगभग चीखते हुए अपने पति विनय से बोली।

एक कांफ्रेंस में विनीता की मुलाकात विनय से हुई थी। कुछ महीनों बाद दोनों ने शादी कर ली। विवाह के दो महीने तक तो सब ठीक रहा लेकिन फिर विनय घर देर से आने लगा। जब भी उसे कहीं जाना होता तो विनय बहाने बनाकर माफ़ी माँग लेता। यहाँ तक कि अपनी बेटी के पैदा होने पर भी वह हॉस्पीटल देर से पहुँचा और सॉरी बोल दिया। कुछ दिनों से विनय के एक्स्ट्रा अफेयर की बातें भी उसके कानों में पड़ी थी और कल तो उसने एक रेस्तरां में विनय को किसी युवती की बाँहों में बाँहें डाले देख भी लिया था। आज उसने विनय के सामने तलाक का पेपर रख दिया तो वह फिर से माफ़ी माँगने लगा तब वह कड़े शब्दों में बोली," अब कोई माफ़ी नहीं.., चुपचाप साइन कर दो वरना तुम्हारे काले कारनामों का पुलिंदा खोलने में मुझे ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं होगी।" कहकर उसने विनय को पेन थमा दिया।

विभा गुप्ता स्वरचित, बैंगलुरु


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