मां ... बुआ इतनी अमीर होकर भी हर साल रक्षाबंधन पर घर की बनी हुई मिठाई और राखी क्यों भेजती हैं, बाजार में कितनी तरह की मिठाइयां और सुंदर-सुंदर राखियां मिलती हैं! रश्मि की बात सुनकर मां ने उसे एक कप चाय बना कर लाने को कहा, रश्मि के हाथ कीचाय पीकर मधु जी बोली... कितनी बेकार चाय बनाई है बिल्कुल स्वादहीन ! मम्मी.. मैंने इतनी मेहनत से और मन से चाय बनाई है और आपको मेरी मेहनत की कदर ही नहीं है! तो बेटा बुआ ने भी तो कितने प्यार से खुद अपने हाथों से राखी और मिठाई बनाकर भेजी है तो क्या तुम्हें बुआ के प्यार और मेहनत की कदर है? इन सब में बुआ का प्रेम झलक रहा है! हां मम्मी.. मुझे माफ कर दो मुझे समझने में गलती हो गई, आगे से मैं ऐसा कभी नहीं कहूंगी !
हेमलता गुप्ता स्वरचित
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