एक नज़र में भी प्यार होता है मैंने सुना था ,पर कभी यक़ीन नहीं किया । जब मेरे दोस्त अपने प्यार की दास्तां सुनाते थे , तो वो किसी फेयरी टेल की कहनियों सी लगती थी । मैं उनसे कहता “ये सब आँखों की गुस्ताखियाँ है पहली नज़र में प्यार ! ऐसा कुछ नहीं होता बोल ! उनकी बहुत खिल्ली उड़ाता था “। लेकिन जब ये प्यार मेरे जीवन में दबे पाव आया तो सब बह गया । मैं लक्की सिंह बॉम्बे की एक सॉफ्टवेर कंपनी में काम करता था । मैंने अपने दोस्तों के कहने पर एक डेटिंग ऐप का इस्तमाल करना शुरू किया । ये ऐप एक खजाने की तरह खुली ! यक़ीन नहीं हुआ…. मुझ जैसे साधारण लड़के के जीवन में भी ख़ुशियो की बरसात हो गई । रोज़ रात घर जाकर मैं ऐप के ज़रिए लड़कियों से बाते करता । पर मिलने की हिम्मत कभी नहीं जुटा पाया , क्योंकि मैं डरता था कि ना जाने कैसी शक्षियत होगी । लेकिन कुछ दिनों में मेरी कियारा से अच्छी दोस्ती हो गई । मैं उससे बाते करने के लिए बैचेन रहने लगा , उससे बाते कर मेरे पूरे दिन की थकान उतर जाती थी । एक दिन मैंने हिम्मत कर पूछ उससे लिया….. क्या हम मिल सकते है । अब तो हम एक दूसरे के बारे में सब कुछ जान चुके है । लेकिन उसने मिलने से मना कर दिया । मुझे लगने लगा शायद मैं अपना समय बर्बाद कर रहा हूँ । मेरे दोस्त मयंक ने भी मुझे चेताया था कि ये सब सही नहीं होता दूसरी तरफ़ कोई धोखे बाज़ भी हो सकती है । यही सोच मैंने बाते करना कम कर दिया ।
कुछ दिन बाद कियारा ने ख़ुद फ़ोन किया और मिलने के लिए बोला ये सुन मुझे यक़ीन नहीं हो रहा था । लेकिन मन ही मन ख़ुशियो के सितार बज रहे थे और कियारा नाम की ही धुन सुना रहे थे । दो दिन बाद मैं तैयार होकर उसकी बतायी जगह पर पहुँचा , तो वो पहले से ही बैठी हुई थी । उसे फूल पकडाते हुए जब मेरी नज़र उसकी नज़रों से मिल चार होने लगी तो पहली नजर के प्यार का एहसास होने लगा । तभी एक बच्चे ने “ माँ “बोल कियारा को पुकारा ! ये सुन मेरे चेहरे की हंसी कब खामोशी में तबदील हो गई पता ही नहीं चला ।
“माँ “ ये कौन है कियारा ??
ये मेरे बेटा रेहान है !
तुम्हारा बेटा ………लेकिन तुमने तो कभी ……और इसके पापा !
वो इस दुनिया में नहीं है…….मैं एक विधवा हूँ !
लक्की मैं तुमसे इतनी बड़ी बात छुपाने के लिए माफ़ी माँगती हूँ ! मैं अपनी दोस्त की बातो में आ गई थी , मैं ये सब रोक सकती थी , पर शायद तुमसे अपना हर दर्द बाँटना ,बाते करना मुझे अच्छा लगने लगा था और मेरा अकेला पन भी दूर होने लगा । लेकिन मैं तुमसे सच नहीं छुपाना चाहती । इसलिए हिम्मत कर आज तुम्हें मिलने के लिए बुलाया हैं ।
लक्की मुझे माफ़ कर दो ! मैंने तुम्हारी भावनाओं को ठैस पहुचाई है , तुम बहुत अच्छे हो तुम्हें मुझसे बेहतर लड़की मिल जाएगी…. ये बोल वो जाने लगी ।
तभी मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा - “मिलेगी हज़ार लड़कियाँ , पर मेरा प्यार तो तुम ही हो” ! मुझे तुम्हारी सच्चाई जान जाकर भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा मैं अब भी तुमसे प्यार करता हूँ और शादी करना चाहता हूँ ।
वो मेरे पास आयी और हंस कर बोली…. आज फर्क नहीं पड़ता , लेकिन कल ज़रूर पड़ेगा बोल चली गई ।
कुछ दिन बाद मैं अपने माँ- बाप के साथ उसके घर पहुँचा और उसके परिवार से उसका हाथ माँगा । मेरी बात सुन वो लोग खुश हुए और बोले हम सबको ख़ुशी होगी अगर वो अपनी नयी ज़िंदगी जिए और आगे बढ़े । पुरानी सोच को बदल नयी सोच के साथ उसके परिवार ने हमारे रिश्तें को दिल से कबूल किया ।
आज मेरी और कियारा की शादी है ! वो मेरे साथ फेरो की वेदी पे बैठी है ,आज भी जब हम एक दूसरे की आँखों में देखते है तो वहीं एहसास महसूस होता है जो पहली बार हुआ था । मैं जिस प्यार को आँखों की गुस्ताखी बोल मज़ाक़ उड़ाता था ,आज उसी प्यार में पड़ मैंने अपनी ज़िंदगी पा ली । आज मैंने अपने प्यार के रूप में अपनी पत्नी और बेटे रेहान को पाया ।अब ये दोनों ही मेरी पहली नज़र का पहला प्यार है ।
स्वरचित रचना
स्नेह ज्योति
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