रीमा अपने परिवार के साथ बहुत खुशी से रह रही थी। वह एम.ए. अच्छे अंकों से पास कर चुकी थी। वह अध्यापिका बनना चाहती थी पर किसी कारणवश उसका बी.एड का पेपर पास नहीं हो पा रहा था। उसके पिता ने उसे बी.एड करने के लिए हॉस्टल भेजने का फ़ैसला किया। रीमा अपने माता-पिता से दूर हॉस्टल जाना नहीं चाहती थी। उसका रो-रो कर बुरा हाल हो गया पर उसके पिता जी ने उसकी एक न सुनी और उसने अपनी बी.एड पूरी की और आज वह अध्यापिका के रूप में कार्यरत है।
स्वरचित
रचना गुलाटी
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