साँवरी

 "ऐ साँवरी! वो दो रुपये का खट्टा मिठा लेमचूस दे ना"

"पहिले पैसे दे"

"दे दूँगा बाद में"

"बिना पैसे का दिया तो बापू मारेंगे.. मैं उधार नहीं दूँगी"  मैं उदास होकर जाने लगता। उसे ना जाने क्या सूझता

"सुन! ये लेजा..पैसे दे देना मगर इसबार" उसका उधार कभी लौटाया ही नहीं। एक दो रुपये और ना जाने कितनी खट्टी मीठी बचपन की उसकी यादों की उधारी है मुझपर। अपने बापू की एक टपरी जैसी दुकान पर बैठा करती थी। एकबार उसके हाथ को भी काट लिया था मैंने जब पीठो खेलते समय उसने गेंद मेरी पीठ पर मारी थी। पर इस बात के लिए उसने मुझे मार नहीं खाने दिया। किसी को बताई ही नहीं। मैं अठारह का रहा होऊँगा जब उसने मुझे टपरी पर बैठे बैठे आँख मारी थी। मैं रात भर सो नहीं सका था। जब गाँव के अपने दोस्त गुड्डू को ये बताया तो वो हँस पड़ा

"वो काली! हहहहहह तू डरा नहीं" ना जाने क्यूँ पूरे गाँव को वो बदसूरत लगती थी और मुझे सबसे सुंदर।

"कल तूने मुझे आँख क्यूँ मारी थी"

"कल मारी थी..आज क्यूँ पूछ रहा है?चल जा आज उधारी नहीं दूँगी"  उसने दुकान की ओट में अपनी आंखें बंद कर गाल मेरी तरफ कर दिया। मैं उसे चुम बढ़े हुए धड़कन के साथ घर आया था। उन यादों से कभी निकला ही नहीं। उस दिन भी नहीं जब चाचा मुझे अपने साथ शहर एक फैक्ट्री में काम करने के लिए ले जा रहे थे। वो टपरी पर बैठे हुए मुझे जाते देख रही थी और मैं भी चाचा से छुपकर उसे। पलट कर देखा तो वो हाथों में खट्टीमीठी लेमचूस लिए टपरी की ओट में चली गई थी और मैं धीरे धीरे उससे ओझल होता गया।

करीब दस साल बाद आया हूँ अपने गाँव। घरवालों ने कोई लड़की देख रखी है।मुझे कहा है पसंद करने को। गाँव में बहुत कुछ बदल गया है, बहुत कुछ वैसा ही है। मैं भी थोड़ा बदल गया हूँ मगर मेरी वो टपरी वैसी ही है और उसपर बैठी साँवरी..!

पता चला उसकी दोनों छोटी बहनों की शादी हो गई। बापू बीमार रहते हैं। मैं कुछ यादों को साथ लिए जा पहुंचा उसकी दुकान पर। वो मुझे देख ना खुश हुई ना उदास।बिना कोई हाव भाव लाये सपाट से लहजे में पूछा

"का चाहिए?"  वो शायद मुझे भूल गई है और उन यादों को भी। पर बरबस ही मुँह से निकल पड़ा

"वही..मगर आज पैसे हैं"

उसने वही खट्टीमीठी लेमचूस मेरे हाथ में रख अपनी गरदन पीछे कर लिए।उसे सबकुछ याद है ये सोच आँसू आ गए। वो भी अपनी भरी हुई आँखें लिए मुझे ताकती रही अपने कुछ सवालों के साथ।

"साँवरी! मैं..पिछला बकाया.. चुकाने आया हूँ"

मैं टपरी की ओट में चला आया। वो कुछ देर मुझे एकटक देखती रही फिर आकर मुझसे लिपट गई।

"साँवरी तू मुझसे ब्याह करेगी"

उसने रोते हुए मेरे माथे को चूम लिया..!

विनय कुमार मिश्रा


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