अपने घर के बरामदे में बैठी कामिनी मटर छील रही थी। तभी उसके पास उसकी भाभी का फोन आया। उसने फोन उठाया नहीं। फिर थोड़ी देर में उसकी ननंद का फोन आया, तब भी उसने नहीं उठाया। पता नहीं आज कामिनी को क्या हो गया था। पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी के भी फोन आने पर तुरंत उठा लेने वाली कामिनी ने फोन नहीं उठाया।
इसका कारण जानने के लिए हमें एक दिन पहले की घटना पर जाना होगा।
कामिनी के पति के प्रमोशन के अवसर पर दोनों पति-पत्नी ने पूरे परिवार को पार्टी दी थी। पार्टी की तैयारी कामिनी ने बहुत अच्छे से कर रखी थी। सबके आने के बाद ठंडा, फिर चाय-पकोड़े, उसके बाद खाना और अंत में मिठाई। परिवार के सब लोग उसके पति के लिए कुछ उपहार भी लाए थे।
सबके उपहार देखकर कामिनी असमंजस में पड़ गई। उसे लगा कि उसने तो कोई लेन-देन की तैयारी ही नहीं की। हालाँकि उसने मायके और ससुराल वालों की जमकर सेवा की थी। घर में नाच-गाना भी हुआ।
पार्टी खत्म होने के बाद जब सबको विदा करने का समय आया, तो कामिनी ने अपनी भाभी, ननंद और बहन को सगुन के तौर पर कुछ रकम दी ताकि कोई खाली हाथ न जाए।
लेकिन जैसे ही उसने सगुन दिया, सबमें कानाफूसी शुरू हो गई—
“हम तो उपहार लाए और भाभी ने सगुन दे दिया। मेरे ससुराल वाले क्या कहेंगे?”
कामिनी की ननंद ने अपनी माँ से कहा।
कामिनी जैसे ही कमरे के अंदर आई, उसने अपनी भाभी को अपने भाई से कहते हुए सुना—
“देखिए जी, आपकी बहन ने क्या दिया है। लड़की का घर है…”
भाई ने भाभी को रोकते हुए कहा—
“कैसी बातें करती हो तुम? चलो, घर चलो।”
बस, उसकी बहन चुप थी और खुश भी।
कामिनी ने सबकी बातें सुन लीं। सबके जाने के बाद वह मन ही मन उदास हो गई।
कामिनी ने अपने पति से कहा—
“पता नहीं गौरव, मैं अपने परिवार के लिए जितना भी कर लूँ, मुझे कभी यश नहीं मिलता। सब लोग गिफ्ट ले आए। चाहे मैं कुछ भी न देती, लेकिन मुझे किसी को खाली हाथ भेजना अच्छा नहीं लगा। इसलिए उपहार का इंतज़ाम न होने की वजह से सगुन दे दिया। अब बताओ, मेरी क्या गलती है?”
यह कहते ही कामिनी रोने लगी।
गौरव ने उसका हाथ पकड़कर समझाया—
“कामिनी, हमारी शादी को 10 साल हो गए हैं। मैं तुम्हें अच्छे से जानता हूँ। तुम सबके साथ दिल से रिश्ते निभाती हो, तभी इतनी दुखी होती हो। धैर्य रखो, सब ठीक होगा।”
मटर छीलते हुए कामिनी को अपने पति की यह बात याद आई। तभी उसने ननंद और भाभी को वापस फोन मिलाया।
कामिनी को लग रहा था कि वे दोनों कमियाँ निकालने के लिए फोन कर रही होंगी। लेकिन हुआ इसके उलट—उन्होंने तो धन्यवाद करने के लिए फोन किया था।
उसके बाद कामिनी के मन का बोझ थोड़ा हल्का हो गया।
दोस्तों, यह बात सच है कि अगर कोई स्त्री दिल से रिश्ते निभाती है, तो उसकी कमियाँ निकालना तो आम बात है। लेकिन इसमें दुखी होना भी जायज़ है। दिल से निभाए गए रिश्तों का फल अवश्य ही मिलता है, चाहे उसमें कुछ समय लगे।
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