"हेलो भाभी!.भैया की ट्रेन कितने बजे है?"
"ट्रेन तो आधी रात में है!.लेकिन बड़ी लंबी उम्र है आपकी।"
"क्यों?"
"अभी-अभी मम्मी जी मुझसे आप ही को फोन लगाने को कह रही थी।"
"अच्छा!"
"हाँ!.पूछ रही थी कि यहां से कुछ खास मंगवाना हो तो बता दें,.अभी पूरा दिन पड़ा है इंतजाम करवा लेंगे।"
"अरे नहीं!. कुछ नहीं।"
"वैसे ठेकुआ,.मठरी और गाँव से आया तीसी, मेथी,पीली सरसों के साथ-साथ मैंने थोड़ा खीर वाला महीन बासमती चावल भी पैक कर दिया है।"
"भाभी इन सब चीजों की कोई जरूरत नहीं!.यहां सब कुछ मिलता है,.आप बेवजह ही भैया को परेशान करोगी।"
"अपनी लाडली ननंद से कह दे कि भले ही वहां सब कुछ मिलता होगा लेकिन माँ का प्यार नहीं!.इसे मामूली सामान नहीं माँ का प्यार समझे जो सिर्फ किस्मत वालों को ही नसीब होता है।"
मोबाइल का स्पीकर ऑन होने की वजह से माँ ने उसकी बात सुन अपना भाषण सुना दिया और सास की बात सुनकर उसकी भाभी तनिक भावुक हो गई।
"सच कहा मम्मी जी!.मेरी ननंद अपनी पड़ोसन को भी अक्सर भाभी कह लेती होगी लेकिन माँ तो बस एक ही होती है दूसरी कहीं नहीं मिलती।"
फोन पर माँ-भाभी की बातें सुन वह भी खुद को रोक ना सकी
"भाभी!"
"हाँ लाड़ो!"
"उन सब चीजों के साथ अपने हाथों की थोड़ी सी गुझियां भी बनाकर भिजवा दो ना!.यहां कहीं नहीं मिलता और मुझे आपकी तरह बनाना भी नहीं आता।"
"हाँ! .हाँ! क्यों नहीं!"
ननंद की फरमाइश से भाभी भाव विभोर हुई।
"और अपनी पसंद की ढेर सारी मल्टी कलर बिंदी और मेरे भतीजा-भतीजी का थोड़ा सा प्यार भी बांध देना!"..
ननंद की फरमाइश सुन भाभी की आंखें छलछला आई और इतना कहते-कहते उसका गला भी रूंध गया..
"यह सब कुछ यहां नहीं मिलता भाभी!"
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