काली रात

    अमावस्या की कालिख से अधिक भी काली रात थी . ना जाने चाँद कहाँ छुपा था और रागिनी का दिल तेजी से धड़क रहा था कि रात के बारह बज चूके . अभी तक राज का कुछ अता पता नहीं .  वो आठ बजे ही फोन पर कहा था कि ऑफिस से निकल रहा आधे घंटे में पहुँच जाएगा।

हे ईश्वर! कहाँ रह गया राज . फोन भी नहीं लग रहा ., स्वीच ऑफ बता रहा . मन आशंकित था कि क्या बात है क्यों नहीं आया . सोचते हुए रागिनी वहीं सोफे पर लेट जाती है  झपकी आ गई है उसे.

लगातार काॅलबेल बजने की आवाज से  अर्द्धनिद्रा की वजह से उठती है रागिनी .

इतनी रात को कौन होगा . शायद राज आया है .कौन है .

भाभी जी खोलिए दरवाजा . मैं पलाश .

झट से रागिनी  ने दरवाजा खोला   कि  गेट के बाहर एक एंबुलेंस खड़ी है दरवाजे पर राज का लंगोटिया यार खड़ा था. उसके शर्ट पर खून के धब्बे लगे हुए थे . भाभी आप अंदर चलो . क्यूं क्या हुआ पलाश जी ! ये एंबुलेंस यहाँ कैसे .

आप आओ ना अंदर ,जबरदस्ती खींचकर अंदर लाता है पलाश और सोफा पर रागिनी को बैठा देता है ।

भाभी साला राज  हम सबको दगा देकर चला गया . अब नहीं रहा वो . एंबुलेंस में उसकी मृत शरीर पड़ी है . हाई वे  एक्सीडेंट में स्पॉट डेथ हो गई थी . एक ट्रक से टक्कर होने के कारण कार के आगे के शीशे से गहरी चोट लगी थी जिसके चलते राज के सारे शरीर में शीशा के महीन टूकड़े चूर हो घुस गए थे . हास्पिटल ले जाने के पहले ही वो हम सबको छोड़कर जा चूका था ।

राज के नहीं रहने की खबर सुनते ही  रागिनी जड़वत हो गई थी . भावहीन सी. कोई रिस्पॉन्स नहीं !

पलाश बोल रहा चाचा चाची को नींद से उठा दीजिए भाभी . राज के अंतिम यात्रा की तैयारी करनी होगी.

रागिनी को काठ मार गया था.

राज की माँ बाऊजी का रो रो हाल बेहाल हुए जा रहा था ।

राज के मौत से रागिनी अभी भी डिप्रेशन में है .  राज के मौत ने उसके सोचने समझने की शक्ति को क्षीण कर दिया था  . चार महीने की गर्भवती रागिनी को गहरा आत्मसात लगा था .  अजीब किस्म की हरकतें करती रहती . चाय पीते समय  जरा सा टेबल पर या जमीन पर गिर जाता तो ऊंगुली से पोंछ कर  चाटने लगती. कामवाली के द्वारा पोंछावाला पानी को हाथ के चुल्लू में उठा पीने लगती . कभी अपने बालों को नोंचने लगती ।

ऐसे अवसादग्रस्त बहू को राज के माता पिता ने बहुत संभाला था . रागिनी के मायके से  माँ बहन देखने सुनने आती रहतीं थी . नौवे माह में बहुत कमजोर दो किलो के शिशु को जन्म रागिनी ने.

नवजात बच्चे को एक महीना तक ऑक्सीजन बाक्स में गया था  ताकि बच्चा  स्वस्थ  हो जाय . एक महीने के बाद रागिनी अपने बेटा के साथ घर आ गई.  पहली बार वह शांत दिखी है सबको।

राज के माँ बाऊजी भी महसूस कर रहे कि प्रसव के उपरांत बदलाव आया है उनकी बहू में .

प्रकृति ने अपना काम किया है उनके घर से बेटा राज चला गया था अब नन्हा राज पोता के रूप में आ गया है ।

रागिनी भी अब सामान्य हो चली है . दस साल बीत गए हैं .राज का बेटा राजन स्कूल जाने लगा है . रागिनी बेटा को देख कर जी रही है ।

-अंजु ओझा

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