शारीरिक शोषण

 अदालत में लड़की ने मुकदमा दर्ज़ कराया था..."चार सालों से ब्वॉयफ्रेंड द्वारा शारीरिक शोषण यानि बलात्कार का।"

आज फ़ाइनल हियरिंग है।लड़़का पूरी तरह से निराश हो गया था.. "पता नही अब क्या होगा? उसने जबरन तो कुछ भी नही किया,बल्कि आपसी सहमति से ही तो सम्बंध बनाये थे और शादी करने की बात करने पर ख़ुद ही टालती रही और बाद में तो वह खु़द ही ब्लैकमेल होता रहा।पुलिस में शिकायत की धमकी देकर तमाम रुपये ऐंठ चुकी वह। पर ये बात मानेगा कौन ? कोई गवाह भी तो नही है और फिर आजकल कानून भी तो लड़कियों के लिए बने हैं, उनके पक्ष में ही फैसला होता है।"  डर की वजह से उसका ह्रदय काँप उठा।

जिरह शुरू हो गई। अंत में लड़के की वकील ने लड़की से कुछ प्रश्न पूछने की इजाज़त माँगी।

"मी लॉर्ड ये लड़़का इसे बहला-फुसलाकर ,नौकरी दिलाने का लालच देकर शहर भगा लाया और चार सालों तक उसका शारीरिक शोषण भी करता रहा ;ऐसा कहना है इसका... "सही कहा ना?" वकील ने लड़की से प्रश्न किया।

"जी हाँ".. लड़की ने संक्षिप्त सा जवाब दिया।

"जैसा कि तुमने कहा कि उसने तुम्हें नौकरी का लालच दिया था" तो मुझे जवाब दो कि उसने लालच दिया और तुम अपना घर ,माँ बाप छोड़कर भाग गई?"

"ज,,जी,,,,,,,,,,,,,,,"

"अच्छा बताओ तुम्हारी उम्र कितनी है?"

"जी..अट्ठाइस साल.."

"यानि कि तुम भागी थी तो चौबीस की रही होगी? है न? पर तुम इतनी भी छोटी बच्ची नही थी कि तुम्हें कोई फुसला सके,ज़बरदस्ती उठाकर भगा ले जाये...क्यों?"

",,,,,,,,,,,,,,"

"घर से भागते समय ये तुम्हारे साथ था?"

"नही! मैं घर से अकेली ही गई थी। हमारी दिल्ली में नौकरी दिलाने की बात हुई थी... वहीं मिला था ये मुझे....पर मैम इसने मेरा शारीरिक शोषण,,,,,,,,"

"यानि तुम निडर भी हो,इसीलिए अकेले ही चली गयी..वो भी किसी अजनबी के पास? और जब उसने पहली बार तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बनाये थे,तुमने तभी क्यों नही शिकायत दर्ज़ कराई थी...अपने माता पिता से क्यों नही बताया? फिर इतने साल क्यों चुप रही?" लड़के की वकील ने एक के बाद एक प्रश्न दागा।

"वो,,वो,,,बहुत डर गई थी मैं।"

"किससे डर गई थी; और आज डर क्यों नही लग रहा है?"

अब लड़की बगलें झाँकने लगी। उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही थी,वहीं लड़के की आँखों में आभार के भाव थे।

प्रतिपक्ष वकील द्वारा तमाम कुप्रयासों के बाद भी अंततः फैसला लड़के के पक्ष में हुआ। लड़की व उसके घरवाले गुस्से में अपशब्द कह रहे थे,पर महिला वकील का मन शाँत था। ऐसी लड़कियों के चंगुल से आज फिर एक निर्दोष को बचाया था उसने।

कल्पना मिश्रा

कानपुर


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