खूबसूरत वजह

 सुधा सुबह से हडबडाते हुए परेशान हो रही थी कारण कलरात पतिदेव मोहन की उनकी दीदी से बातचीत ...दीदी कह रही थी वो अपने तीनो बच्चों सहित गर्मी की छुट्टियों में पंद्रह दिनों तक रहने आ रही है ...अब वो कैसे अपनी छ: महीने की बेटी आराध्या की देखभाल करेगी और कैसे मेहमानों की ...चार लोगों की पसंद नापसंद ....सासूंमां बुजुर्ग है सब्जी काट देती है और आराध्या को संभाल लेती है मगर परेशानी किचन की है ...एक तो जून की गर्मी उसपर किचन में उसे ही लगना होगा पहले ही किचन की गर्मी से परेशान थी उसपर दीदी और बच्चों का आना ...जाने कबतक किचन की गर्मी में रहना पडेगा... खैर ...वो उठी आराध्या को सासूंमां को देकर किचन में लगी राजमा चावल कटहल आलू गोभी पूरियां रायता बनाने मे जुट गई बारह बजे तक जैसे ही निपटी दीदी बच्चों सहित आ गई ...फिर चाय नाश्ता करवाया ....दोपहर का भोजन करवाकर जैसे ही आराध्या को दूध पीलाकर सुलाने की कोशिश कर रही थी स्वयं की भी आँख लग गई .....आराध्या के रोने पर नींद खुली जोकि गीली होने पर रोई थी तुरंत आराध्या का डाइपर बदला देखा तो समय पांच पार हो चुका था - हे भगवान..... अभी तो बर्तन पडे होगे दोपहर के ...रात के खाने का इंतजाम भी करना है ...सोचते हुए जैसे ही किचन में पहुंची तो वहां का नजारा अलग ही था बर्तन घुले हुए करीने से सजे थे गैस चालू थी एक और कढाई तो दूसरी ओर कुकर चढा हुआ था ....और दीदी और उनकी बडी लडकी रसोई संभाले हुए थी....

दीदी ...आप यहां.... और ये कया है ....आप तो छुटियां मनाने आई है फिर ...

अरे कुछ नही सुधा ....बस रात के खाने के लिए पालक पनीर तुम्हारी पसंद का और अरहर की दाल बना रही हूं..... रात मे रोटियां गर्मागर्म सेंक देगे जब सब खाएगें ...

पर दीदी आप ....मे कर लेती ....

सुधा ....हम यहां इंजाय करने आए है बोझ बनने नही ...और ये कैसी गर्मी की छुट्टियां जिसमें एक बेटी इंजाय करें तो दूसरी किचन की गर्मी मे तपे .....

मिलजुलकर काम करेंगे तो सभी इंजाय भी करेंगे और खुश भी रहेंगे ....हे की नही ....

चलो अब तुम मेरी भतीजी को संभालो तबतक मे और चेतू यहां किचन में काम संभालते है ....

सुधा भीगी हुई आँखो से बाहर आते हुए सोच रही थी - दीदी आप जैसी ननद जो अपनी भाभी के लिए ऐसे फिक्रमंद हो सबकी हो जाए तो गर्मी की छुट्टी किसी भी बहु बेटी के लिए सजा नही बल्कि खुशी और मजा की खूबसूरत वजह बन जाएगी....


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