मंजरी एक पढ़ी-लिखी, सपनों से भरी लड़की थी। उसके दिल में बचपन से ही अपने गांव के एक लड़के, रवि, के लिए खास जगह थी। दोनों की दोस्ती कॉलेज के दिनों से गहरी थी और मंजरी मानती थी कि उसकी ज़िंदगी रवि के बिना अधूरी है। पर किस्मत ने उसके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। एक दिन घर में उसकी शादी की बात पक्की हो गई — बिना मंजरी की रज़ामंदी के, सीधे-सादे लेकिन ईमानदार युवक यश के साथ।
यश के परिवार में सिर्फ उसकी मां थी, जिनका स्वभाव बहुत ही शांत और सरल था। शादी में दहेज के नाम पर बहुत कुछ दिया गया — पैसे, गहने, स्कूटी और भी बहुत कुछ। मंजरी का मन ससुराल में बिल्कुल नहीं लगता था। वो दिन भर फोन पर रवि से बातें करती, उसे हर वक्त याद करती, और ससुरालवालों से कट कर रहती। यहां तक कि घर का छोटा सा भी काम वह हाथ नहीं लगाती थी, न सास के साथ बैठती, न यश को कभी एक गिलास पानी देती।
यश हर शाम थका-हारा ऑफिस से लौटता, फिर भी कभी शिकायत नहीं करता। मां के साथ मिलकर खुद ही अपना खाना निकालता, और मंजरी को खाने के लिए बुलाता, मगर मंजरी हमेशा अकेले कमरे में खाना पसंद करती।
एक दिन, मंजरी ने घर के खाने की बुराई कर दी और सासू मां को अपशब्द कह दिए। गुस्से में यश से रहा नहीं गया — उसने पहली बार मंजरी पर आवाज ऊंची कर दी। मंजरी को जैसे झगड़े का बहाना मिल गया। वह अपनी स्कूटी उठाकर सीधी रवि के पास पहुंच गई। रवि पहले से ही कहता था — "तू मेरे साथ भाग चल, कहीं दूर।" मंजरी ने उससे कहा — "जब शादी हुई थी, तब तो तुमने मुझे वापस लौटा दिया था, तब बोला था कि पैसे और गहने लेकर आओ, खाली हाथ कहां जाओगी?"
रवि बोला — "हां, इस दुनिया में नई शुरुआत के लिए पैसे जरूरी हैं, कल शाम तक पांच लाख लेकर आ जाना, होटल का पता भेज रहा हूं।"
मंजरी को अपने मायके और ससुराल के पैसे याद आ गए। दिमाग में चल रहा था कि अलमारी की चाबी कैसे मिले। वह घर लौटी, पति से झगड़ा किया, और अलमारी की चाबी मांगी। यश ने बिना सवाल किए चाबी थमा दी, और बोला — "खाना खा लेना, हम सब साथ बैठकर खाना खाएंगे।"
मंजरी ने अलमारी खोली — वहां पैसे, गहनों के साथ एक डायरी थी। उसमें लिखा था:
"मंजरी, मुझे पता है तुम्हारे दिल में किसी और के लिए जगह है। तुम्हारे पापा ने मुझसे वादा लिया था कि तुम्हें कभी दुख नहीं दूंगा। तुम्हारी खुशी सबसे ऊपर है, अगर मेरी जरूरत नहीं तो इन पैसों और गहनों के साथ तुम आजाद हो। बीच की डायरी में तलाक के कागज रखे हैं, मेरे साइन हैं, बस तुम्हारे बाकी हैं। एक अनुरोध है — मां की इज्जत करना, क्योंकि जिसने मां की कद्र नहीं की, उसका जीवन कभी सुकून नहीं पा सकता।"
मंजरी का दिल कांप उठा। उसे अचानक अहसास हुआ कि सच्चा प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं, बल्कि देने, निभाने और किसी के आत्मसम्मान की रक्षा करने का भी है। उसे रवि के लालच, उसके झूठ और खुद की गलतियों का गहरा पछतावा हुआ।
उसने फोन उठाया, रवि का नंबर डिलीट कर दिया, सिम तोड़ दी।
अगली सुबह वह जल्दी उठी, नहा-धोकर, सुंदर सी साड़ी और गाढ़ा सिंदूर लगाकर रसोई में जा पहुंची। सासू मां से बोली — "मां, आज आप बस आराम करो, सारा काम मैं करुंगी।"
खुद खाना बनाकर मां को खिलाया, यश के ऑफिस जाने के बाद उसने पहली बार उसके ऑफिस जाकर उसे घर का बना खाना दिया।
ऑफिस में सब हैरान रह गए — मंजरी ने सबके सामने यश का हाथ पकड़कर कहा, "आई लव यू, मेरे पति। मुझे माफ कर दो, मुझे सच्चा प्यार तुमसे ही मिला है। अब तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊंगी।"
यश की आंखों में खुशी के आंसू थे। वह जान गया था, मंजरी बदल चुकी है। दोनों ने मिलकर एक नई शुरुआत की — जिसमें ना कोई शिकवा था, ना दहेज, ना लालच — सिर्फ प्यार, सम्मान और विश्वास।
सीख:
प्यार वही, जो बिना शर्त, सम्मान और समर्पण के साथ हो।
रिश्ते में सबसे बड़ा धन — भरोसा और साथ है।
पैसे से खरीदी जा सकती है चीजें, लेकिन दिल नहीं।
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