सासु मां और जलन,,,

 मम्मी जी देखना यह सूट कैसे हैं इन्होंने मुझे पैसे दिए थे अपने लिए कुछ कपड़े ले लेना ,,बड़े खुश होते हुए कृति ने अपने सासू मां को अपने लिए खरीदे हुए सूट दिखाते हुए कहा ,,,जैसे ही सासू मां ने उसके कपड़ों को देखा देखते ही मुंह टेढ़ा हो गया और उन में कमियां निकालना शुरू कर दिया ,,,तुम्हारी पसंद न जाने कैसी है।,,, इनके एक भी कलर अच्छे नहीं लग रहे हैं।,,, यह तुम्हारे ऊपर तो बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगेंगे,,,  तुम्हें कपड़े खरीदना नहीं आता है। बिचारी कृति के आंखों में आंसू भर आए और सोच में पड़ गई मेरे घर में तो सभी मेरे ही पसंद किए हुए कपड़े पहनते हैं और मेरे पति को भी मेरा ड्रेसिंग सेंस अच्छा लगता है पता नहीं क्यों मम्मी जी को मेरे खरीदे हुए कपड़े अच्छे क्यों नहीं लगे,,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था फिर यह बात उसने अपने पति को भी बताएई तो उसके पति ने उसे समझाया तुम परेशान मत हो ,,,मम्मी की तो  आदत है क्योंकि तुमने अपने लिए कपड़े खरीदे हैं। और इसमें मेरी दोनों बहनों के कपड़े नहीं थे इसलिए मम्मी को जलन हो रही थी कपड़ों को देखकर मम्मी के छाती पर सांप लौट रहे थे और वह दोनों तो अपनी ससुराल में है जब आएंगी मैं उन्हें कपड़े दिलवा दूंगा और हंसने लगे,,

चलो छोड़ो मैंने तो खाली तुम्हें अपने  कपड़ों के लिए पैसे दिए थे वैसे भी मैं उन दोनों के लिए हमेशा कुछ ना कुछ दिलवाता ही रहता हूं। और रही बात मम्मी की उनकी बातों को दिल पर मत लगाया करो,,, हंसते हुए कृति के पति ने बात को यहीं विराम दे दिया,,,,,,,


मंजू तिवारी गुड़गांव

स्वालिखित मौलिक रचना 


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