रजनी सुबह उठकर, चाय का कप हाथ में लिए ,अखबार में नजरें टिकाए हुए थे कि अचानक उसका फोन बजा । ओह !सुबह-सुबह किसका फोन आ गया? तभी उसके दिमाग में घंटी बजी ,कहीं शालू का तो नहीं ?लगता है आज फिर छुट्टी पर है ।एकदम सही अंदाजा था उसका। फोन शालू का ही था ।
हेलो दीदी ,मैं शालू बोल रही हूं ।हां बोल ,क्या हुआ ?वह दीदी आज मैं काम पर नहीं आ पाऊंगी ।क्यों ,अभी 2 दिन पहले ही तुम्हें छुट्टी ली थी ?हां दीदी, ली तो थी ।पर मेरी तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी और मैं काम पर आ गई थी। आज बहुत कमजोरी और चक्कर महसूस हो रहे हैं ।उठने की भी हिम्मत नहीं है ।बस इतना सुनते ही रजनी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया ,और फोन पर ही लगी उसे जली कटी सुनाने।" देख शालू रोज-रोज बीमारी का बहाना करके तू छुट्टी लेती रहती है ।अगर काम नहीं होता तो बता दे ।मैं कोई और इंतजाम कर लूंगी ,पर रोज रोज झूठ बोलकर छुट्टी लेना ठीक नहीं है ।अगर तेरी तबीयत खराब है तो दवाई लेकर 2 घंटे देरी से आकर भी तो काम कर सकती हैं ,पर नहीं काम पर तो आना ही नहीं है ना। इस बार पैसे काट कर दूंगी तो तेरा दिमाग ठिकाने आ जाएगा ।ऊपर से मुझे तू यह बता रही है कि तूने बीमारी में आकर भी मेरा काम किया ।काम करना है तो कर नहीं तो रहने दे," कहकर रजनी ने फोन काट दिया, और बड़बड़ करती हुई चाय पीने लगी ।
तभी मोहित कमरे से अंगड़ाई लेते हुए आया और बोला कि क्या हुआ ?सुबह-सुबह क्यों चालू हो गई बड़बड़ करने ?रजनी का मूड तो पहले से ही अपसेट था ।ऊपर से मोहित के ऐसे शब्दों ने "आग में घी का काम" किया ।मुझे किसी पागल कुत्ते ने नहीं काटा , जो बिना बात के बड़बड़ करूंगी ।महारानी सुबह सुबह फोन कर देती है। तबीयत खराब है ,काम पर नहीं आऊंगी ।हां ,तो इसमें इतना गुस्से की क्या बात है उसकी तबीयत खराब तभी तो नहीं आ रही ।अब रजनी ने दो-चार जली कटी मोहित को भी सुना डाली ।"तुम उसकी इतनी तरफदारी मत लिया करो ।अपने काम से काम रखो ।जब देखो उसी का पक्ष लेते हो ।मुझसे नहीं उसी से शादी करनी थी तुम्हें ।मोहित ने रजनी को तिरछी नजरों से देखा ,पर कुछ बोला नहीं। उठकर तैयार होने के लिए कमरे में आ गया ।
रजनी नाश्ता और टिफिन की तैयारी में लग गई ।सोचा था की आज शॉपिंग करने जाऊंगी ।लो हो गई शॉपिंग ।अब करो झाडू खटका ।चलो नाश्ता और टिफिन तो तैयार हुआ ।तब तक मोहित भी टेबल पर आ चुका था कि थी दरवाजे पर घंटी बजी ।मोहित ने दरवाजे पर शालू को देखकर बोला अरे तुम !तुम्हारी तो तबीयत ठीक नहीं थी ....इतना ही बोला था। रजनी ने बीच में ही टोक दिया की ऑफिस के लिए देर हो रही है और नाश्ता भी ठंडा हो रहा है ।मोहित ने अपनी जुबान दबा ली और नाश्ता करने लगा। शालू किचन में जाकर बर्तन धोने लगी। अभी कोई दस-पन्द्रह मिनट ही हुए होंगे कि कुछ जोर से गिरने की आवाज आई। रजनी ने नाश्ते की टेबल पर बैठे-बैठे ही जोर से बोलकर फिर से शालू को "जली कटी सुनानी" शुरू कर दी,गुस्से में बर्तन मत तोड़,कोई जबरदस्ती नहीं थी मत आती काम पर, अब आ गई तो थौबड़ा बना कर काम करेगी, हूंह .....। मोहित ने रजनी को इतनी जली कटी सुनाने पर टोकना चाहा पर इस बार भी पहले की तरह शांत रहा ।
उसने नाश्ता किया और अपनी प्लेट किचन में रखने के लिए गया ,क्योंकि मोहित अपनी झूठी प्लेट हमेशा खुद ही रख कर आता था।मोहित जैसे ही किचन में गया और जोर से आवाज लगाकर रजनी को बुलाया ,"रजनी जल्दी आओ "।रजनी ने किचन में जाकर देखा तो शालू बेहोश पड़ी थी।दोनों ने उसे जल्दी से उठाकर गाड़ी में लिटाया और पास ही के एक नर्सिंग होम में ले गए । वहां जाते ही डॉक्टर ने उसकी जांच पड़ताल करके कुछ टेस्ट करवाने के लिए बोला। तब तक उन्होंने शालू के घर भी खबर दी । शालू का पति रवि और उसका बेटा दोनों अस्पताल पहुंचे।
रवि ने मोहित के आगे हाथ जोड़कर कहा ,"बाबू जी हमारी औकात यहां पर इलाज कराने की नहीं है आप कहे तो मैं यहां से .….."।"अरे नहीं-नहीं "!मोहित ने बोला। ऐसा सोचना भी मत अभी डॉक्टर ने इसकी खून की जांच के लिए बोला है जांच की रिपोर्ट आने के बाद देखते हैं कि क्या करना है। तब तक इसे यहीं रहने दो और खर्चे की चिंता मत करो। रवि को कुछ तसल्ली हुई और कमरे से बाहर आकर बेंच पर बैठ गया।
रजनी दोपहर को घर आई और कुछ खाने पीने का सामान बैग में रखकर फिर अस्पताल पहुंच गई ।उसने रवि और उसके बेटे को खाने के लिए बोला दोनों भूखे थे । तो दोनों ने खा लिया ।शाम को रिपोर्ट आई और उसमें शालू को टाइफाइड निकला जो कि बिगड़ गया था ।डॉक्टर ने बताया करीब 1 महीने का समय शालू को ठीक होने में लगेगा।
शाम को शालू को होश आ गया ।रजनी उसके पास ही खड़ी थी । उसने शालू के सिर पर हाथ रखा और आंखें झुकाकर उससे माफी मांगी।शालू ने मुस्कुराकर हल्के से सिर हिलाकर आँखें बंद की जैसे की वह कहा रही हो इसकी कोई जरूरत नहीं। डॉक्टर ने उसे चेक करते हुए कहा कि एक हफ्ता तो कम से कम हॉस्पिटल में ही रखना होगा ।मोहित ने डॉक्टर से बातचीत करके कहा कि आप उसे अच्छे से अच्छा इलाज दे। रवि आगे बढ़ा और हाथ जोड़कर कर बोला "बाबू जी मैं आपका एहसान कभी नहीं भूलूंगा"। रवि ने मोहित गले लगाकर कहा की "इंसान ही इंसान के काम आता है"।रजनी मोहित की तरफ देख गर्व महसूस कर रही थी और खुद को शर्मसार महसूस कर रही थी। जिसे बिना कहे मोहित ने भांप लिया था ।
स्वरचित/मौलिक
पूजा गर्ग
दिल्ली
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