ये देख लो, तुम्हारे लाडले का रिपोर्ट कार्ड... इतने कम नम्बरों से पास हुआ है। इससे तो अच्छा है कंही चुल्लू भर पानी मे डूब मर।कितना खर्च करता हूँ इसकी पढ़ाई लिखाई पर लेकिन ये नालायक का नालायक ही रहेगा। वो वर्मा की बेटी इसी के स्कूल में पढ़ती है टॉप कर गयी।
जाने भी दो जी पास तो गया न आप भी जब देखो उसके पीछे ही पड़े रहते हैं। सुनैना ने बात संभालते हुए रौनक को अंदर जाने के लिए इशारा कियस। परन्तु पिता के मुंह से अपने लिए जली कटी बातें सुनकर रौनक गुस्से में घर से निकल गया। बारहवीं की परीक्षा में महज तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ था रौनक, उसका मन पढ़ाई लिखाई में कम और गायकी में ज्यादा लगता था।आये दिन मोबाइल पर अपने गानों की रील और वीडियो बनाकर अपलोड करता रहता। पिता चाहते थे कि जो सपना वो अपनी जिंदगी में पूरा नही कर पाए अब बेटे को पूरा करता हुआ देखें।
अधिकांश भारतीय घरों में यही देखने मिलता है माता पिता जो खुद हासिल नही कर पाते अपने बच्चों से उसकी उम्मीद लगा बैठते हैं।
जब देर शाम हो गयी और रौनक घर नही आया, तो सुनैना की बैचेनी बढ़ने लगी, पति को बताया तो उसे ज्यादा सिर पर मत चढ़ाओ किसी दोस्त के घर बैठकर गाने गा बजा रहा होगा।
अब तो रात के 10 बज गए थे सुनैना के साथ साथ पहली बार उमाकांत को भी डर लगने लगा। उसके सारे दोस्तों के घर पता कर लिया था पर रौनक कंही भी नही था। सारी रात यूं ही गुजर गई थी सुनैना मुश्किल से अपनी रुलाई रोके बैठी थी कि मोबाइल की रिंगटोन सुनकर कलेजा मुंह को आ गया।
किसी अस्पताल से फोन था कि आप यंहा आ जाइए, बाकी बातें बाद में बताते हैं।
सुनैना और उमाकांत को काटो तो खून नही, जैसे तैसे गिरते पड़ते अस्पताल पहुंचे। वंहा रौनक के साथ एक पुलिस कर्मचारी और शहर के बड़े संगीतकार प्रकाश जी जी भी थे। रौनक ने बताया कि वह गुस्से में अपनी जान देने नदी की ओर ही गया था वंहा इन महोदय जी की गाड़ी टकराकर नदी में गिर गयी थी जिससे गाड़ी में बैठी 10 वर्षीय बेटी उछलकर डूबने लगी।उसे बचाने के लिए रौनक नदी में कूद गया। जब तक रौनक पानी से बाहर आया फेफड़ों में पानी समा जाने की वजह से अचेत हो गया।
रौनक को सही सलामत देखकर उमाकांत सुबह की सारी बातें भूल गए, बेटे को गले लगाते हुए रोये जा रहे थे। कहते हैं अंत भला तो सब भला अब रौनक की गायकी को एक मजबूत दिशा जो मिल गयी थी।
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