ये क्या भाभी आज आपको फिर मायके जाना है फिर यहां का काम कौन देखेगा आपको तो काम न करने का बहाना चाहिए आशी अपनी भाभी को जली कटी सुनाने
लगी प्रीति चुप ही रही क्यूंकि वो मांजी को बता चुकी थी अपनी परेशानी की उसकी मां की तबीयत ठीक नहीं है तो उन्हे दो तीन दिन अस्पताल ले कर जाना है छोटा भाई अभी इतना सम्हाल नही पायेगा
तभी आशी की मां उर्मिला जी बाहर आई और आशी से बोली बोलने से पहले कुछ सोच लिया करो वो नौकरानी नही बहु है इस घर की और वो मां है उसकी आज उन्हे जरूरत है तो उनका साथ देना बेटी की जिम्मेदारी है कल को तेरी जरूरत मुझे हुई तो तू ससुराल से नही आयेगी क्या ;बेटियां मायके रहने ही नहीं जिम्मेदारी भी निभाने जाती है ।
आशी बोली मां अब आप मुझे जली कटी मत सुनाओ।
तब प्रीति बोली मांजी जली कटी नही तुम्हे समझा रही है कल जब तुम ससुराल जाओगी तब समझ आएगा तुम्हे मायके का प्यार और जरूरत कहकर प्रीति निकल गई..!
स्वरचित
अंजना ठाकुर
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