आस्तीन के सांप

 बरसात नजदीक आ रही थी रमन जर्जर हो चुके घर की मरम्मत में लगा था अचानक उसके हाथ से एक बड़ी मोटी सी लकड़ी फिसल गई, और सारी मिट्टी की दीवार भरभराकर गिर गयी। अब काम तो बढ़ गया था, और पैसों की व्यवस्था भी नही थी ऐसे में अम्मां बाबू जी और रमन तीनों ने मिलकर निर्णय लिया गया कि छोटा ही सही घर नया बना लिया जाए। 

अमन और रमन दो भाई थे, अमन शहर के बड़े कपड़ा शोरूम में काम करता और वंही अपके साथ रहता था।

रमन भी पढ़ाई लिखाई के चलते अपने भाई के साथ शहर आया था पर आय का कोई जरिया न होने से वापस गांव चला आया।

गांव में उनकी बहुत थोड़ी सी जमीन थी जंहा अम्मां बाबू जी खेती करते थे और रमन गांव के बच्चों को ट्यूशन दिया करता था। गांव के स्कूलों में प्रायः अच्छे शिक्षकों की कमी रहती है रमन विनीत और राजेश तीनों दोस्तों की ट्यूशन अच्छी चल पड़ी।

रमन ने अपने दोस्तों को घर की समस्या बताई तो विनीत और राजेश दोनों ने उसे अपने हिस्से के पैसे दे दिए। रुपये कम पड़े तो अमन से मांगे लेकिन अमन ने अपनी आय और खर्चों का हवाला देकर साफ इंकार कर दिया। दोस्तों की मदद से घर का काम शुरू हुआ ही था कि अमन शहर में प्लॉट खरीदने के लिए पिता से पैसे मांगने लगा।सबने समझाने की कोशिश की, कि फसल आने तक इंतजार कर ले लेकिन अमन भी जिद पर अड़ा रहा... कि अभी शहर में सस्ते दामों पर प्लॉट मिल रहा है फिर हाथ से निकल जायेगा।

अब मजबूर होकर अमन को पैसे दे दिए गए, जो उसने शहर में जाते ही जुंए और शराब में उड़ा दिए। बाबूजी अपने जी 'आस्तीन के सांप'को बर्दाश्त नही कर पाए और खाट पकड़ ली। 

किसी तरह दो कमरों का मकान बनाकर जैसे तैसे रमन ने बरसात से बचने की व्यवस्था तो बना ली पर बाबूजी को बचाया न जा सका। अच्छा भला परिवार बिखर गया।

स्वरचित व अप्रकाशित

आस्तीन का सांप


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