विशाल सीए बनकर अभी एक कंपनी में लगा था! विशाल शुरू से ही बहुत होशियार था और उसके सपने भी बहुत बड़े थे! विशाल अपने बचपन की दोस्त सुहानी से प्रेम करता था! विशाल और सुहानी ने साथ जिंदगी बिताने के अनगिनत सपने देखे थे! आज विशाल बहुत खुश था! वह सुहानी से अपने रिश्ते की बात करने जैसे ही घर पहुंचा देखा …उसके मम्मी पापा आज बहुत खुश नजर आ रहे हैं! विशाल ने उनसे इतना खुश होने की वजह पूछी तो विशाल के पापा ने कहा-- बेटा आज मैं बहुत खुश हूं ,आज विक्रम जी स्वयं अपनी बेटी के लिए तेरा रिश्ता मांगने आए थे! विक्रम जी बहुत बड़े उद्योगपति हैं !वह एक फ्लैट गाड़ी गहने और नगद तो अभी देंगे ही, बाद में अपना सारा कारोबार तुझे सौंप देंगे; ईशा इनकी इकलौती बेटी है! सोच कर देख तेरे सारे सपने इतनी जल्दी पूरे होने जा रहे हैं ! पर पापा .….आपको तो पता है मैं सुहानी को चाहता हूं और उसी शादी भी करना चाहता हूं! मैं उससे बहुत प्यार करता हूं ! अरे प्यार व्यार सब बकवास बातें हैं; और सोच कर देख तेरा खुद का बंगला गाड़ी तेरा भविष्य ..क्या होगा ,इस तरह उन्होंने विशाल को सब्जबाग दिखाने शुरू किए और विशाल भी उनके दिखाएं सब्जबाग में फस गया !उसे लगा सुहानी से अलग होकर थोड़ा दुख जरूर होगा ;किंतु आगे मेरा भविष्य कितना उज्जवल होगा! अगले ही दिन वह ईशा से मिलने उसके घर गया! वहां जाकर उसे पता चला कि ईशा मंदबुद्धि है! इसीलिए विक्रम जी अपने पैसों के दम पर विशाल को खरीदना चाहते थे! विशाल ने इस रिश्ते से मना कर दिया-- कहा कि वह पैसों की खातिर ईशा से शादी करके अपनी जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकता !वह तुरंत सुहानी के पास पहुंचा, किंतु सुहानी ने यह कहकर विशाल से रिश्ता तोड़ लिया कि वह ऐसे लालची व्यक्ति से आगे कोई भी संबंध नहीं रखना चाहती! थोड़े से लालच की वजह से आज विशाल ना “घर का रहा ना घाट का” उसने लालच की वजह से सुहानी को भी खो दिया!
हेमलता गुप्ता
स्वरचित
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