शादी के पाँच वर्ष तक निःसंतान रहने पर निभा दम्पत्ति ने एक प्यारी सी बच्ची को गोद ले लिया।बच्ची के आगमन से उनके सूने जीवन की बगिया में बहार आ गई ।मानो सूखे रेगिस्तान में रिमझिम बारिश हो गई हो।निभा दम्पत्ति बड़े लाड़-प्यार से बेटी निम्मो की परवरिश कर रहे थे।
निभा के पति प्रशांत तो बेटी की छोटी-सी-छोटी इच्छा भी पूरी करते,इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि निम्मो जिद्दी होती चली गई। बराबर कोई बहाने बनाकर स्कूल न जाना उसकी आदत बन गई। स्कूल से शिकायतें आने पर उसके पिता स्कूल ही बदल देते थे।बेटी के निरंकुश व्यवहार से व्यथित होकर निभा टोका-टोकी करती,तो प्रशांत पत्नी को चुप कराकर बेटी का ही पक्ष लेते।
कहा गया है 'अति सर्वत्र वर्जयेत्।'अर्थात् अति सब जगह बुरी होती है।अत्यधिक लाड-प्यार से निम्मो की आदतें बिगड़ चुकी थीं।उसने पढ़ाई छोड़ दी और आवारा किस्म के लड़कों से दोस्ती कर ली।
एक दिन इसके पिता प्रशांत ने बेटी निम्मो को आवारा किस्म के लड़कों के साथ सिगरेट और शराब पीते हुए देख लिया।प्रशांत बेटी के कारनामों के कारण काफी उत्तेजित और गुस्से में थे।पत्नी निभा ने पति को समझाते हुए कहा -"जब बेटी को सही सीख देनी थी और अनुशासन में रखना था,तब तो आपने खोखला प्यार दिखाया।'अब पछताए होत क्या,जब चिड़ियाँ चुग गई खेत।'
पत्नी की बातों ने प्रशांत के गुस्से में अग्नि में घी के समान काम किया। वे बेटी को देखकर गुस्से से उबल पड़े और उसे डाँटते हुए कहा -"निम्मो!हमारे निःस्वार्थ प्यार का तुमने नाजायज फायदा उठाया है!आज से तुम्हारा बाहर जाना और दोस्तों से मिलना बिल्कुल बंद!"
निम्मो ने उस समय तो कुछ नहीं कहा,बस आँखें तरेरकर अपने कमरे में चली गई। एक दिन बात निभा दम्पत्ति की लाश कमरे में मिली।पुलिस अनुसंधान से पता चला कि निम्मो ने ही दोस्तों के संग मिलकर उनका गला घोंट दिया था।
इस लोमहर्षक घटना से सभी जानकार स्तब्ध थे।कुछ लोग कह रहे थे कि इतने दिनों तक निभा दम्पत्ति ने आस्तीन में साँप पाल रखा था,जिसने समय पाकर उन्हें डँस लिया।
समाप्त।
लेखिका-डाॅक्टर संजु झा (स्वरचित)
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