पूर्वाग्रह

 मधु जी जी बड़े चाव से अपनी नववधू तान्या का स्वागत करती हैंं। 

तान्या पढ़ी लिखी सुशील लड़की है, लेकिन पूर्वाग्रह के चलते उसके मन में सास की छवि एक बुरी महिला के रूप में ही उभरती हैं।

मधु जी तान्या से बहुत प्रेम भरा बर्ताव करती हैं लेकिन तान्या उनसे सही से बात ही नहीं करती। सारा दिन उसकी मम्मी फोन पर उसे हिदायतें देती रहती। कभी-कभी तो तान्या अपनी सास को #जली कटी भी सुना देती।

मधु जी सारी परिस्थिति भांप रही थी। वह जानती थी कि तान्या दिल से बुरी नहीं है, बस उसका मन थोड़ा चंचल है। दूसरों की बातों के बहकावे में जल्दी आ जाती है। मधुजी अपने घर को बचाने के लिए हर संभव प्रयासरत थी।

उन्होंने प्यार से तान्या को समझाया भी था लेकिन वह सुनने को तैयार ना थी। अगर सास बहू में झगड़ा होता तो चक्की के दोनों पाटों के बीच पिसता उनका बेटा ।

एक दिन मधु जी के बेटे आदित्य ने अपनी मम्मी से पूछा भी था, "मम्मी पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूँ, आप कुछ खोई- खोई सी रहती है। क्या बात है मम्मी? क्या तान्या का व्यवहार कुछ सही नहीं है।"

मधु जी बोली,"नहीं बेटा ऐसी कुछ बात नहीं है। ब्याह शादी की थकान है ना। कुछ दिन में उतर जाएगी।"

मधु जी ने तान्या के खराब व्यवहार के विषय में अपने बेटे आदित्य को कुछ भी नहीं बताया। वह नहीं चाहती थी कि बहू बेटे के मधुर वैवाहिक जीवन में कुछ खटास आए। वह स्वयं ही सह रही थी। उन्हें अपने भगवान पर पूरा भरोसा था।

एक दिन तान्या अपनी फ्रेंड्स के साथ पार्टी करने गयी। लौटते वक्त स्कूटी स्लिप होने से उसके पैर में फ्रैक्चर हो जाता है।

तान्या अपनी मम्मी को आने के लिए कहती हैं, लेकिन उसकी मम्मी अपनी फ्रेंड्स के साथ टूर की व्यस्तता का बहाना बनाकर आने के लिए मना कर देती हैं। 

वही उसकी सास और उसका पति उसकी रात-दिन सेवा करते हैं।

तान्या को एहसास होता है कि वह कितनी गलत थी। तान्या की आंखों से पश्चाताप के आंसू झर झर गिरने लगते हैं। तान्या अपनी सास से माफी मांगने लगती है। मधु जी उससे बड़े प्यार से अपनी बाहों में भर लेती हैं।


स्वरचित मौलिक

   प्राची लेखिका

बुलंदशहर उत्तर प्रदेश


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