कमला देवी कमरे से चिल्ला रही थी पर बहु अनसुनी कर अपने काम मै व्यस्त थी कमला देवी बिस्तर से उठने मैं असमर्थ थी और उनका बिस्तर गीला हो गया था जिस वजह से वो कपड़े बदलने के लिए आवाज लगा कर चिल्ला रही थी
काफी देर बाद बहू आई और जली कटी सुनाने लगी की थोड़ी देर गीले मैं रहोगी तो कुछ बिगड़ नही जायेगा
अब मै रसोई का काम करके ही बदल पाऊंगी है भगवान जाने कौन से पाप किए थे जो ऐसी सेवा करनी पड़ रही है जाने कब मुक्ति मिलेगी
उसकी जली कटी बातें सुन कमला देवी की आंखों से आंसू निकल गए आज उन्हे अहसास हुआ की ये बहू के नही उनके बुरे कर्म है जो उन्होंने अपनी सास के साथ किया अब बही उनके साथ हो रहा है अब उन्हें याद आ रहा था की कैसे अपनी सास को बात बात पर जली कटी सुनाती थी बेचारी पूरा घर सम्हालती फिर भी कमला ना उन्हे भरपेट खाने को देती बीमार हो जाने पर दवाई पर भी खर्च नहीं करने देती बल्कि सेवा करने पर अपने पति से खूब लड़ती कहीं न कही उनकी बददुआ लगी होगी उन्होंने बेकार मैं उनको सताया
तभी बहू बोली अब तो क्यों रही हो इतना कर तो रहे है
कमलाजी बोली बस यही दुआ कर रही हूं कभी तेरे साथ ऐसा न हो जो मेरे साथ हो रहा है..!
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