गिरगिट की तरह रंग बदलना

 रात को जैसे ही संध्या अपने बेड पर सोने के लिये गई, उसे मोबाईल पर मैसेज टोन बजती है.. गुलफ़ाम शायर का मैसेज था..Hi Sandhya 😍..I love You..🥰🥰

मैं रात दिन तुम्हारे ही बारें में सोचता रहता हूँ,
संध्या जी मैं आपकी सादगी पर फ़िदा हूँ..😍.. तू गंगा की मौज मैं गंगा की धारा ....मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ..

संध्या ने थोड़ा अचरज़ से वह मैसेज पढ़कर मुस्कुराक़र जवाब दिया,  अच्छा, 🤔.. आइये तो जरा, हम भी आपको अपनी कुछ "धारा"  बताएंगे, कल दोपहर दो बजे आ जाइये, कानपुर के सिविल लाइन "बार" में 🙄..
वह गुलफ़ाम शायर इसे संध्या की स्वीकृति समझकर खुशी से झूम उठा , अरे वाह, पहली मुलाकात, और वह भी "बार" में, कल जरूर मिलता हूँ आपसे..🥰..आप तो बहुत ही फ्रैंक हो डियर..😍😍
                             
अभी कल ही कि तो बात थी जब "एडवोकेट संध्या" अपने कोर्ट के काम निपटाने के बाद फ्री होकर मोबाईल देख रही थी कि उसे एक "फ्रेंड रिक्वेस्ट" का नोटिफिकेशन दिखता है.. किसी "गुलफ़ाम शायर" का.. संध्या को शेरो शायरियां बहुत पसंद थी, लिहाजा उसने गुलफ़ाम शायर की प्रोफाइल चेक की, वह लखनऊ से था, उसकी ओपन प्रोफाइल थी, जिसमें ढेरों शेरों शायरियां थी, बहुत से लोग उसकी पोस्ट पसन्द करते थे, यह देखकर सन्ध्या ने उसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली।

संध्या की वह व्यक्तिगत प्रोफाइल थी जिसमें उसके प्रोफेशन से जुड़े लोग एवम क्लाइंट्स को उसने बिल्कुल भी नहीं जोड़ा था, इसलिए उसकी प्रोफाइल में एडवोकेट प्रोफेशन के बारें में नहीं लिखा था। यही वजह थी कि आये दिन कोई न कोई मनचला उसके मैसेंजर पर आकर इस तरह की हरकतें करता रहता था, अनुभवी अधिवक्ता उन सबको सबक सिखाना खूब जानती थी।

कल रात को ही यह गुलफ़ाम शायर अपनी सस्ती सी शायरी भेजकर अपने इरादे जाहिर कर चुके थे,
दिल एक है पर जिस्म जुदा है,
तेरी अदाओं पर हम फ़िदा हैं..
❤️ गुलफ़ाम शायर
यह शायरी पढ़कर संध्या और उसके पति मुकेश ठहाके मारकर हँसते हैं,  मुकेश जी को यक़ीन था कि संध्या उसे उचित समय आने पर सबक सिखाकर रहेगी।
                          कल रात गुड नाईट के बाद आज सुबह गुड मॉर्निंग का मैसेज, और फिर दर्द भरी दिलफेंक शायरी पढ़कर संध्या चिढ़कर उस गुलफ़ाम शायर को ब्लॉक करने वाली थी, मग़र तभी उसे लगा कि यदि उसने अधिवक्ता होकर भी इस मनचले को सबक नहीं सिखाया तो यह बाक़ी महिलाओं के साथ भी यही करेगा..
                                ★★

अगले दिन दोपहर 1.50  जब संध्या कोर्ट के काम में व्यस्त होने की वजह से इस गुलफ़ाम शायर की बात भूल भी चुकी थी कि तभी गुलफ़ाम शायर का मैसेंजर कॉल आता है।..
हेलो संध्या मैं कानपुर के सिविल लाइन्स में पहुँच कर "कैप्सूल रेस्टोरेंट एंड बार" में खड़ा हूँ, तुम कहाँ पर हैं?..😍

संध्या - अरे मैं दूसरे बार में हूँ, आप वहीं रहना मैं अभी 10 मिनट में अपनी सफेद स्विफ्ट कार आपको लेने के लिए भेजती हूँ, आप बार के गेट पर ही रहना, मेरा ड्राइवर हॉर्न  देगा तो आप उसके साथ आ जाना।
इधर गुलफ़ाम शायर के अरमान हवा में उड़ने लगे, सोचने लगा बड़ी मोटी मछली हाथ लगी हैं, साल दो साल तो मजे से गुज़र  जायेंगे..
दस मिनट में एक सफ़ेद मारुति स्विफ्ट कार वहां रुकती है, ड्राइवर के हॉर्न देते ही गुलफ़ाम शायर खुशी से कार की पिछली सीट पर बैठ जाता है, और संशय दूर करने के लिए ड्राइवर से पूछता है, मैडम कहाँ हैं?
ड्राइवर- जी वह बार में, आपका इंतजार कर रहीं हैं।
                        ★★★
दस मिनट बाद वह ड्राइवर उस गुलफ़ाम शायर को लेकर एक जगह कार पार्क करता है, जहां उसे काला कोट पहने एडवोकेट संध्या जी एवम दो कॉन्स्टेबल के सामने नज़र आतें हैं।
यह देखकर गुलफ़ाम शायर घबराहट में कहता है  संध्या जी आपने तो मुझे किसी "बार" में मिलने को कहा था, और धाराओं की बात कर रहीं थी।

इस पर हवलदार तुकाराम ने कहा जी बिल्कुल सही कहा था इन्होंने, आप इस वक्त कानपुर अधिवक्ता एसोसिएशन "बार" में ही है,  और इतनी धाराएं लगाएंगी की जिंदगी भर जेल में ही सड़ जाओगे, किसी वकील का इंतज़ाम कर लीजिये, इन्होंने आप पर छेड़खानी एवम अश्लील बातें करने के जुर्म में आप पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-A , धारा 354-D लगवाई हैं।

संध्या "बहन" मुझे माफ़ कर दो, मैं नही जानता था कि आप वकील हैं, मैं आगे से यह गलती दुबारा नहीं करूँगा, मैं आपको अपनी बहन मानता हूँ, मैं अब से फेसबुक तो क्या सारी दुनियां की महिलाओं को अपनी बहन मानूँगा..
एडवोकेट संध्या सहित उस कचहरी में 'गिरगिट की तरह रंग बदलतें हुये" गुलफ़ाम शायर को देख रहे थे।
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✍️स्वलिखित
अविनाश स आठल्ये
सर्वाधिकार सुरक्षित


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