सोनल अपनी माँ को फोन करके बता रही थी माँ तुम्हारे जाने के बाद मैने सब गिफ्ट और शगुन के लिफाफे खोल कर देखे तो मामी ये दे गयी, मौसी के लिफाफे में इतने थे, नंद ने सोने की चैन दिया था पर भाभी के लिफाफे में इतने थे शायद वो गलती से एक नोट रखना भूल गयी होगी, मैने कहा हो सकता हैं अगले दिन फिर फोन घनघना उढा माँ तुम्हारे लिफाफे में भी दो नोट कम निकले है आप तो कह रही थी इतने है और जबकि मैने भी आपके साथ कांऊट किये थे , ये सब कौन चोरी कर रहा है।
मेरा भी माथा ठनका तो मैनें कहा तुम सब तो नैनी पर बच्चा छोड़कर पार्लर चले गये थे ये गुड़यां को तेरा कमरा बदं करके सुला रही थी
मै अदंर गयी भी कहने कि जब कमरे में कोई नहीं है तो बाहर वाले कमरे में सुला ले तो बोली जाग जायेगी और पार्टी में परेशान करेगी तो मैम डा़टेंगी मै चुप हो गयी क्योंकि मुझे मालूम था उस कमरे में तेरा कैश रखा है और सास ससुर के पर्स भी
मुझे तो तेरी नैनी पर ही शक है बाकी काम वाले तो उस कमरे में जाते ही नहीं जबकि मेरे पर्स मे भी रुपये कम निकले तुझसे तो मैनें डर के मारे कहा नहीं की कही तेरी नैनी काम ना छोड़ दे और तुम तो यही कहती कि आपको तो हमेशा काम वलो पर शक होता है। मैने तुझे हजार बार सीख दी की नौकरचाकर के घर में हर समय अलमारी में ताला लगा कर रखाकर इन बडे़ शहरो की नौकरानियो का कोई ईमान धर्म नहीं होता कब चूना लगा जाये ये तो ये जानती है कि कचहरी कोतवाली का तो इन मैडमो पर समय है नहीं,
कितनी बार समझाया कि ये नौकरचाकर घर के भेदी होते है झटकते रहनी चाहिए बीच बीच में आस्तीन, सांप छुपे रहते है इनमें अपनेपन के
क्या मतलब माँ ,यही की बीच बीच में इधर उधर रूपये या छोटा मोटा कीमती सामान जानबूझ कर गिरा देना चाहिए इनके अपनेपन की टेस्टिंग के लिए।
खैर चलो इसको तो निकालो सोचो कम पर ही बीती कल को बच्चा चुरा कर भाग जाती तो बस भगवान् का शुक्रिया करो जान बची लाखो पाये।
अनु अग्रवाल
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