अस्पताल के बाहर लाँन में बैठा अनिल अब तक छः सिगरेट पी चुका था तभी पीछे से किसी ने आवाज दी - अनिल जी...
हाय जेसिका तुुम...तुम यहा कैसे... पापा का रुटीन चेकअप करवाने आई हूं दिल का आपरेशन हुआ है उनका कुछ महीने पहले.... वैसे अब ठीक है चेकअप हो गया वापिस घर ले जा रही हूं लेकिन तुम यहाँ क्या कर रहे हो जेसिका ने पूछा ...
पत्नी का किडनी ट्रांसप्लांट करवाना है
तो तुम इतने परेशान क्यों हो रहे हो...ठीक हो जायेगी बात ये है जेसिका कि ...एक किडनी की आवश्यकता है और इतनी कोशिशों के बाद भी ...
तो मैं हूं ना... जेसिका ने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा क्या तुम...तुम्हारे परिवार वाले कुछ बोलेंगे नहीं..
अरे बुदधू , शहीद की पत्नी हूं देश के काम आना तो हमारे लिए सौभाग्य की बात है...
डॉक्टर को बोलो तैयारी कर ले..अगले एक दो दिन मे आ रही हूं अभी चलती हूं वह मुस्कुराते हुए बोली...
मगर तुम्हारे तो पापा का भी ...आइ मीन उनकी देखरेख.... तभी पीछे से आते एक बुजुर्ग बोले-मेरी चिंता मत करो ....ऐसे वक्त मे हर देशप्रेमी का यही तो फर्ज होता है ...मै ही हूं जेसिका का पिता ...और हां घबराओ मत तुम्हारी पत्नी जल्दी ठीक हो जाएगी ...
कहते वो बुजुर्ग मुस्कराते जेसिका के साथ आगे को बढ गए.....दोनों हाथों को जोडें अनिल भीगी आँखों से धीरे से बुदबुदाया - आसान नहीं है अपने आप में देशप्रेम का ऐसा जज्बा पैदा करना.....
जेसिका...तुझे और तेरे शहीद पति को दिल से सलाम...
और ऐसे देशप्रेमी पिता के जज्बे को दिल से सेल्यूट...
आज ऐसे वक्त मे भी जब कोरोना जैसे खतरनाक वायरस के विरुद्ध हमारे ऐसे ही कर्मवीर युद्ध लड रहे है तो उनके दिए निर्देशों को मानिए ...
दोस्तों ऐसे देशप्रेम और इस युद्ध मे हमें भी मौका मिला है सहयोग करने का ...भागीदार बनने का ... सभी सरकार की अपील को मानिए ...
घरों मे रहिए ...सुरक्षित रहिए ...
जय हिंद
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