रात के 12 बजे अचानक हुई आवाज से सुधा की नींद खुल गई उसने मन के अंदेशे को दूर करने के लिए पति मोहन को जगाया-सुनो कुछ आवाज हुई अभी...
अरे यार सो जाओ तुम्हें वहम हुआ होगा ..कहकर पलटकर मोहन खर्राटे भरने लगा ...अभी चंद मिनट ही निकले थे की फिर से आवाज ने दोनों को उठा दिया ..
मैंने कहा ना ...कोई है ..सुधा धीमे से बोली
कही बच्चे पानी के लिए तो नही उठे ..मोहन बोला
नही मे पानी का जग रखकर आई हूं और उन्हें बताकर भी...मोहन उठा और ड्रोल से टाँर्च निकालकर पास से एक डंडा उठाकर कमरे से बाहर निकल पडा पीछे पीछे सुधा भी चलने लगी देखा तो कुछ आहट रसोईघर से आ रही थी ....मोहन कुछ डरा भी हुआ था ....रसोईघर की लाइट जलाकर बोला-को..कौन है ...देखा तो एक व्यक्ति हट्टा कट्टा मास्क पहने रसोईघर मे खडा था ...ऐ...आगे नही बढना वरना मार दूंगा... रसोईघर का चाकू उठाते वो चिल्लाते हुए बोला....
कौन...कौन हो तुम..
आप इससे इंटरव्यू क्या ले रहे हो अपने पुलिस वाले दोस्त को फोन कीजिए ..तबतक मै इसे देखती हूं
सुधा दहाडाते बोली.....
नही ....बाबूजी ...दीदी ...पुलिस नही ...देखिए मैने चाकू फेंक दिया ...कहते उसने चाकू फैंक दिया...
चोरी कर रहे हो और कहते हो कुछ नही किया....सुधा बोली ...
चोर ...नही दीदी... मै चोर नही हूं ...मै तो एक मजदूर हूं ...गरीब मजदूर.... तीन दिनों से सरकार ने सब बंद कर दिया... काम धंधा बंद कर दिया ...जो पैसा बचा था उससे अनाज लेने गया ...
मगर ...लूट रहे है आटा चावल चीनी ...दोगुने दाम पर मिल रहा है ....आखिर बचे पैसों मे जो अनाज मिला लाकर घर पर दे दिया ...
मगर सब खत्म होने पर ...बच्चे भूखे रो रहे थे मै और मेरी पत्नी तो आँसु पीकर संतोष कर रहे थे मगर बच्चों को ...क्या करता बाबूजी ...मै कोई चोर नही हूं ..वरना आपके रसोईघर मे अनाज नही ढूंढता आपकी अलमारी या कमरों मे कीमती सामान ढूंढता ...कहकर रो पडा .....मोहन ने डंडा दूसरी ओर फैंकते कहा -समझता हूं भाई ...सब समझता हूं हालात और मजबूरी को ....
कुछ जमाखोरों और कुछ लोगों ने राशन दुकानों मे कीमतें बढाकर लोगों को लूटना शुरू किया हुआ है ...
खैर ....घबराओ मत ...सुधा ...भाई को जरुरी अनाज सब्जी और कुछ रुपये दे दो ...सुधा ने एक थैला निकाला कुछ स्टोरेज कुछ फ्रिज मे से समान देते हुए कहा-घबराओ मत भैया बुरा वक्त है गुजर जाएगा .....
हर काली रात की सुबह जरुर होती है ....वो समान लिए रोते हुए दरवाजे से बाहर निकल गया ...वही दोनों पति पत्नी भीगी पलकों को छुपाते चुपचाप वापस बिस्तर पर आकर सो गए....दोस्तों जाने कितनी बार लिखते समय मे स्वयं निशब्द सा हो जाता हूं ...दोस्तों आपके दोस्त बृजमोहन की ऐसे वक्त मे एक अपील है सिर्फ और सिर्फ इंसानियत याद रखिए ... ये बुरा वक्त भी गुजर जाएगा.... आखिर इस काली रात को दूर करने ...
वो सुबह कभी तो आएगी....वो सुबह कभी तो आएगी
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