बहुरानी गलत मत समझो, जान हो तुम हमारी। कभी-कभी तो इस मन को बेटे से भी ज्यादा तुम लगती हो प्यारी। आज भी याद है वह दिन छोटे से गुड्डे को जब गोदी में उठाया था। सच मानो उस दिन से ही उसकी होने वाली छोटी सी दुल्हनिया का अनजान सा चेहरा भी मन में बसाया था। आज तो घर का हर काम मशीनों से ही होता है सच मानो तुम्हारी सासूमां ने तो पानी के लिए भी हमेशा हैंडपंप को खींचा है।
तुम मोबाइल में इतनी व्यस्त थीं कि तुम्हें पता ही नहीं चला कि मैं नहा कर आने के बाद रसोई में भी आ चुकी हूं। तुम फोन पर लगातार बोले जा रही थी कब कब और कैसे कैसे मैंने तुम्हें तंग किया?
तुम्हें बुरा लगता है ,जब मैं तुमसे अपने कमरे में चाय मंगवाती हूंऔर रसोई का सारा काम तुमसे ही करवाती हूं? कभी सोचा है, तुमसे पहले भी और तुम्हारे जाने के बाद भी यह काम बखूबी होता है। तुम्हें रसोई सौंपने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद था कि तुम्हें महसूस हो कि यहां सब कुछ तुम्हारे किऐ से ही होता है। घर का काम तुम्हें तंग करने के लिए नहीं बल्कि सिखाने के लिए मैं तुमसे करवाती हूं। बिट्टू को तुम ही खिलाओ उसे मालिक और तुमको घर की मालकिन होने का एहसास करवाती हूं।तुम्हारे आने से 1 दिन पहले तक सारा काम करने वाली तुम्हारे आने के 1 दिन बाद मैं अपाहिज नहीं हो गई हूं। मैं अपना खाना अलग इसलिए ही खाती हूं कि तुम्हें यह ना लगे की तुम्हारे खाने पर मैं रोक या नजर लगाती हूं। तुम्हारा खिलखिलाना मुस्कुराना मुझे अच्छा लगता है पर तुम कहीं पीछे ना रह जाओ ऐसा ही डर सा लगता है। सिर्फ इसलिए ही मैं तुम्हें कभी डांटती और समझाती हूं।
तुम्हें शिकायत है कि बिट्टू मम्मा ब्वॉय है। हर बात मुझे बताता है। यह एहसास तुम भी एक दिन महसूस करोगी जब तुम्हारी गोद में भी कोई बिट्टू खेलेगा। अगर बिट्टू कुछ भी पूछेगा तो अपने अनुभव से कोई भी मां उसे सही बात ही समझाएगी अपने घर को वह सदा सुरक्षित ही बनाएगी । बेटे से प्यार है तो बहू से बैर हो ही नहीं सकता। हां बेटा तो मां की डांट में भी प्यार समझता है, लेकिन अगर बहू सास को मां ना समझे तो उसे उसके प्यार में भी मतलब ही दिखता है।कुछ भी फोन पर अपने मायके में बताते हुए क्या तुमने कभी सोचा अगर बिट्टू का अपनी मां को हर बात बतलाना अपराध है, और तुम्हारे विवाहित जीवन में अवरोध है ,तो तुम्हारा इस घर की हर बात उस घर में पहुंचाना उचित है? आज इस घर में जैसे तुम आई हो कल तुम्हारी सासू मां आई थी, बहुत मेहनत से इस घर को भरा पूरा है, भले ही ऐसा करके तुम पर एहसान नहीं किया गया, माना इस घर में सारे हक है तुम्हारे, परंतु इस घर की सारी जिम्मेवारी किसी और की है क्या? अपने घर में पति के सिवाय और सब को भी अपना मान के तो देखो? घर तुम्हारा है घर के लोगों को भी जान के तो देखो। आज तुम स्वस्थ हो कार्य ज्यादा कर सकती हो, माना थक भी जाती होगी, कोई परेशानी हो तो अपना अहंकार छोड़ कर किसी से सहायता मांग कर तो देखो?
ननदों से क्या मुकाबला करना ?और क्या कहना? वह तो इस घर की बेटियां हैं, हर सास चाहेगी कि उनकी बेटियां सदा सुखी रहें, इसलिए नहीं कि वह तुम्हें दुखी करना चाहती हैं, बल्कि इसलिए कि वह चाहे भी तो अपनी बेटियों के लिए सिवाय बातों के, बहुत कुछ नहीं कर पाती हैं। उसको कुछ भी दो तो वह तुम्हारी नज़र में रहता है, कभी सोचा है इस घर का सब कुछ तो तुम्हारा ही होता है। घर जब हस्तांतरण होकर तुम्हारे पास आता है तो बेटियों को कुछ भी देने से पहले तुम्हारे मुंह की और देखा जाता है। इसके बावजूद भी तुम कहती हो की सासु सिर्फ ननदों की ही माता है।
तुम जिस घर में आई हो उस घर के लिए कुछ करके तो देखो। थोड़ा सा अपने मन में धैर्य धरके तो देखो। शायद उनका कुछ भी तुम्हें बोलना उनका दिया हुआ एक इम्तिहान ही हो, उसे जरा एक बार पास करके तो देखो। उनके दिल में एक बार जगह बना कर तो देखो, इतना प्यार मिलेगा कि सब कुछ भूल जाओगी, और अपने घर को बेहद खुशहाल पाओगी। यह खबर मन को कितना सुकून और सुख देती है जबकि एक सास सबके मना करने के बावजूद भी अपनी एक किडनी अपनी बहू को देती है।
पाठक गण इस ब्लॉग के माध्यम से एक सास की भावना उसकी बहुओं तक पहुंचाने की कोशिश जरूर की है मैंने, सफल किडनी हुई हूं यह तो आप ही बता सकते हैं।
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