शिव और रवि बहुत ही अच्छे मित्र थे। उन्होंने साथ साथ पढ़ाई की थी। शिव का स्वभाव गंभीर था वह छोटी-छोटी बातों से प्रभावित हो जाता था और उसके मन मुताबिक कोई चीज नहीं होती थी तो उसे बहुत ही गुस्सा आ जाता था ।रवि ठीक विपरीत स्वभाव का था। वह हमेशा हंसता मुस्कुराता रहता और हर बात को सरलता से लेता था। पढ़ाई पूरी होने पर उन्हें अलग अलग जगह पर नौकरी भी मिल गई । शादी और बच्चे हो गए। शिव पुणे में अपनी पत्नी सुमिता , बच्चे नमन और नेत्रा के साथ रहता था। रवि पेंड्रा में अपनी पत्नी शेफाली, बच्चे निधि और विधि के साथ रहता था। कुछ साल बीतने पर शिव का ब्लड प्रेशर हमेशा बढ़ा हुआ रहता था ।उसका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो गया था। एक बार तो अचानक ही उसकी तबीयत बहुत खराब हो गई ।उसके बाद डॉक्टर ने उसे कुछ दिन आराम करने की और स्थान बदलने की सलाह दी। तब शिव ने सोचा कि रवि हमेशा बुलाते रहता है तो वहीं चलते हैं ।कुछ दिनों की छुट्टियां लेकर वह सपरिवार पेंड्रा पहुंच गया। रवि उसे लेने आया था।स्टेशन से घर तक जाते हुए आसपास के दृश्य बहुत ही सुंदर दिखाई दे रहे थे। ऊंचे ऊंचे पहाड़ ,पेड़ शांत वातावरण था।घर पहुंचकर शिव बहुत थका हुआ महसूस कर रहा था। सुमिता और शेफाली तो बातें करने और नाश्ते की तैयारी करने में लग गए। चारों बच्चे आपस में मिलकर खेलने लगे। नाश्ता तैयार हो गया सब खाने लगे तो देखा कि चटनी में नमक ज्यादा है। शेफाली ने कहा मुझसे नमक ज्यादा डल गया है। तब रवि ने उसे तुरंत कहा इसमें थोड़ा सा दही मिला दो तो बराबर हो जाएगा । उसकी बात सुनकर शिव हैरान था। रवि की जगह अगर वह होता तो अभी तक सुमिता को दस बातें सुना चुका होता कि तुम्हें ठीक से काम करना भी नहीं आता ।तुम्हें मालूम है कि मुझे कम नमक खाना है लेकिन तुमने ज्यादा नमक डाल दिया है और शायद गुस्से में नाश्ता ही नहीं करता।लेकिन रवि ने माहौल को एकदम अच्छा बना दिया था ।इस तरह एक-दो दिन बीत गए।
रवि ने बताया कि आज उसे उसके ऑफिस में प्रमोशन की लिस्ट आने वाली है और उसे आशा है कि उसका प्रमोशन हो जाएगा। जब शाम को रवि आया तो मिठाई लेते हुए आया था। सबने यही सोचा कि उसे प्रमोशन मिल गई है लेकिन उसने बताया कि इस बार उसे प्रमोशन नहीं मिल पाई है किसी अन्य साथी को प्रमोशन मिल गई है। तब शिव ने कहा कि मिठाई लेकर क्यों आए हो।
रवि ने हँसते हुए कहा क्या हुआ वह भी तो मेरा साथी है। उसे प्रमोशन मिला है , मुझे भी एक दिन प्रमोशन मिल ही जाएगा। मिठाई खाने के लिए समय नहीं देखना चाहिए जब मन करे तब मिठाई खा लो।तुम लोग भी आए हो बच्चे भी आए हैं तो हमारे लिए तो यह खास अवसर है। चारों बच्चे खुशी-खुशी मिठाई खाने लगे।
रवि बच्चों के साथ बच्चा बनकर खेलने लगा। कभी उन्हें घोड़ा बनकर अपने पीठ में बिठा लेता ,कभी उनके साथ लूडो खेलने लगता ।शिव तो बच्चों की आवाज सुनते ही चिढ़ जाता था ।उसके घर आते ही नमन और नेत्रा चुपचाप पढ़ने में लग जाते। घर का वातावरण एकदम शांत हो जाता था। यहां अपने बच्चों को इतनी धमाचौकड़ी करते और इतना खुश उसने पहली बार ही देखा था। सुमिता को भी शेफाली के साथ हँस हँस कर काम करते , दुनिया भर की बातें करते देख रहा था। सुमित उससे बहुत ही कम बातें करती थी। डरती थी कि पता नहीं उसकी किस बात पर शिव को गुस्सा आ जाये।
तभी अनाउंसमेंट होने लगा कि कल यहां दिनभर बिजली नहीं रहेगी, कुछ मेंटेनेंस का काम चलने वाला है ।शिव तो यह यह सुनकर ही तनाव में आ गया। रवि ने कहा क्या हुआ बिजली नहीं रहेगी तो चलो कल हम सब पिकनिक पर चलते हैं ।उसने अमरकंटक जाने का कार्यक्रम बना लिया। रात में ही आधी तैयारी कर ली गई। सुबह सुमिता और शेफाली ने मिलकर खाने पीने की चीजें बना ली। बच्चों ने खेलने की चीजें रखी।सुबह जल्दी ही सभी निकल गए। रास्ते में सुंदर दृश्यों का आनंद लेते हुए अंताक्षरी खेलते हुए वहां पहुंचे। वहां पहुंचकर मां नर्मदा का दर्शन किया।लॉज के पास ही झील थी। बच्चे उसमें बोटिंग करने लगे। सेफाली सुमिता ने खाने की चीजें निकाल ली। सब मिलकर खाना खाने लगे। वहां के रास्ते ऊपर नीचे थे। शिव तो ज्यादा इधर-उधर घूम नहीं रहा था ।वह एक जगह बैठकर ही दृश्यों का आनंद ले रहा था। लेकिन बाकी लोग घूम फिर रहे थे।कपिलधारा और अमृत धारा देखने गए ।पत्थरों पर चल रहे थे तभी अचानक शेफाली के पैर में मोच आ गई ।रवि ने तुरंत आकर उसे संभाला। उसके पैरों की मालिश की। उसे ऐसा करता देख शिव फिर सोचने लगा अगर मैं इसकी जगह पर होता तो सबके सामने ही सुमिता के ऊपर चिल्लाने लगता कि तुम देख कर चल नहीं सकती हो, अब देखो मोच आ गई है।
रवि शेफाली को सहारा देकर बेंच पर लाकर बैठा देता है।धीरे धीरे चलते हुए सब गाड़ी तक आते हैं।शाम ही रही थी। सब वापसी के लिए निकलते हैं। रास्ते में ही एक ढाबे में रुकते हैं और खाना खाकर घर आते हैं। दूसरे दिन सुबह से रवि घर से गायब रहता है। जब आता है तो बहुत सारी नाश्ते और अलग-अलग तरह की खाने की चीजें लेकर आता है जिससे शेफाली को आराम मिल सके। वह शेफाली को दवाई देता है और दिनभर आराम करने को कहता है।उसे तरह ध्यान शेफाली की परवाह करते देख शिव फिर सोचने लगता है कि मैंने तो कभी भी सुमिता का इस तरह ध्यान नहीं रखा है जबकि सुमिता यहां भी उसकी दवाइयों और खाने पीने का बाकायदा ध्यान रख रही है। पहले दिन की थकान के कारण उस दिन किसी को कुछ बनाने का मन नहीं था इसीलिए रवि बहुत सारी खाने की चीजें ले आता है जिससे सुमिता और शेफाली को उस दिन आराम मिल जाता है। दो चार दिन और धूमते फिरते शॉपिंग करते गुजर जाते हैं।
अब शिव के वापस जाने का समय आ जाता है। रात को रवि शिव से कहता है तुम बिल्कुल भी नहीं बदले हो ।बल्कि तुम्हारा स्वभाव तो और ज्यादा चिड़चिड़ा होते जा रहा है। इस तरह से छोटी छोटी बातों पर गुस्सा होते रहोगे तो घर परिवार में खुशियां कैसे आएंगी। देखो यहां से जाओ तो पुरानी सारी बातें यहीं छोड़ कर जाओ।एक नई जिंदगी की शुरुआत करो ।जिंदगी ने हमें कितने सुहाने अवसर दिए हैं। सबसे शिकायतें करना छोड़ दो और शुक्रिया करना सीखो।
शिव ने भी इन कुछ दिनों में जिंदगी को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया था। जिन छोटी छोटी चीजों से उसे शिकायत होती थी उसे रवि ने कितनी आसानी से हल्का कर दिया था।अब उसे भी अपनी जिंदगी को शुक्रिया कहना था और बच्चों के साथ बच्चे बनकर खेलना था ।सुमिता का साथी बनना था ।वह मन ही मन निश्चय करता है कि मैं अब खुश रहूंगा और जिंदगी जो भी मुझे मिला है उसके लिए हमेशा ईश्वर को शुक्रिया कहूंगा। शिव के चेहरे के बदलते भाव देखकर रवि को भी विश्वास हो गया कि अब शिव अपने आप को बदलने के लिए तैयार है।
दूसरे दिन शिव रवि से वादा लेता है कि इस बार की छुट्टियों में वह सपरिवार पुणे आएगा।सभी एकदूसरे से हाथ हिलाते हुए विदा लेते हैं।
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