राजकुमार जी ऑफिस से आते ही अपनी धर्मपत्नी विनीता को आवाज दिए . कहाँ हो जी . जी आती हूँ रसोईघर से आवाज आती है विनीता की .
जल्दी आओ भई! बहुत जरूरी खबर है सुन लो जरा . अच्छा जी कहिए ! अपने भींगे हाथ को पल्लू से पोंछते विनीता राजकुमार जी के सामने आ खड़ी हो जाती है . अरे पहले बैठो इत्मिनान से सुनो. कल रूपा को देखने के लिए पवन जी सपरिवार आ रहे हैं . ऐसा करो आज ही रूपा को लेकर ब्यूटीपार्लर चली जाओ । पार्लर वाली से कहना कि एकदम टीप टॉप दिखनी चाहिए मेरी बेटी .
अरे आप भी ना ! एक दिन में कैसे काया कल्प हो सकता रूपा का . हाँ ब्यूटीपार्लर जाने से थोड़ी बहुत चेहरे पर निखार आ सकती है पर साँवला रंग गोरा थोड़े हो जाएगा।
रूपा जैसी है वैसी ही पसंद लड़का कर लेगा ! भगवान ऊपर से सबकी जोड़ी बना कर भेजता है . इसलिए ये सब दिखावेबाजी की क्या जरूरत है और मेरी बेटी कमाऊ है ,
इसकी जरूरत नहीं है . आप चिंतित ना होएं।
अरे विनीता तुम क्यों नहीं समझती हो . पवन जी का बेटा इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट में है . पवन जी सामने से विवाह का प्रस्ताव भेजे हैं और तुम ऐसे नुक्ताचीनी का राग अलाप रही हो .समय के अनुसार बदलो विनीता .
राजकुमार जी की बात से विनीता चिढ़ जाती है कि ये कैसे पिता हैं . अपनी बेटी को ही अंडरइस्टिमेट कर रहे .
भक्क !इनसे कुछ बोलना फिजूल है . बुदबुदाहते हुए चल दी विनीता चाय लाने रसोईघर चली गई।
रूपा के ऑफिस से आते ही राजकुमार जी फरमान सुना देते हैं कि माँ के साथ पार्लर चली जाओ। रूपा चुपचाप सहमति जताते हुए अपने कमरे में चली आई।
विनीता रूपा के कमरे में आयी . बेटा कल फिर एक लड़का का परिवार तुम्हें देखने आ रहा है लड़का इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट में है ,तुम्हारे पापा कह रहे कि लड़का के पिता खुद से अपने बेटा के लिए तुम्हारा हाथ माँगे हैं ।
मम्मी ! कल फिर मेरी नुमाइश होगी . मेरे रंग रूप की टीका टिप्पणी होनेवाली है . ये पाँचवा परिवार है जो मुझे देखने आ रहा है . अब आप बताओ कि मैं बैंक में पी ओ हूँ एम एस सी स्कालर ! कल यदि लड़के वालों ने मुझको कुछ कहा तो ईंट का जवाब पत्थर से देनेवाली हूँ उसके बाद शादी के लिए जोर मत देना , कहते हुए स्कूटी की चाभी लेकर बाहर निकल गई रूपा ।
हे प्रभु ! कल वाला मोर्चा संभाल देना वरना बवाल हो जाएगा . ये लड़की भी खार खाए बैठी है।
मन ही मन विनीता जी आहत थी कि मेरी पढ़ी लिखी बेटी को देखने आनेवाले लड़कों के परिवार वाले उसके साँवलेपन की वजह से अस्वीकार कर गए थे . उसके वजूद का हनन था और जज्बात का भी .
खैर !
दूसरे दिन पवन जी अपने परिवार के साथ पधारे हैं और साथ में पत्नी , बेटा संजय , बेटी सुरभि है जो संजय से छोटी है । राजकुमार जी के साथ पवनजी बेतकल्लुफ हैं और उनकी पत्नी नीता भी विनीता से खूब हँस बोल कर बतिया रही . सुरभि और संजय भी आपस में कुछ आपस में बात कर रहे .कभी कभी मोबाइल में भी ऊंगुली फेरने लगते दोनों .
करीब पन्द्रह मिनट के उपरांत रूपा चाय की ट्रे लेकर आती है . उसे देखते ही नीता जी खड़ी हो जाती हैं अरे बेटा ! आओ मेरे पास बैठो .रूपा उनकी आवाज में अपनत्व महसूस करती है .
नीता जी बड़े आमोद से अपने करीब बिठा लेती हैं . बेटा रूपा तुम हमें नहीं जानती पर हम सब तुम्हें जानते हैं. तुम्हारी काबिलियत के मुरीद हैं हम सब ! इसलिए तुम्हारा हाथ मांगने आए हैं राजकुमार भाई साहब व विनीता जी से .
पर आंटी आप मुझे कैसे जानती हैं. आश्चर्यमिश्रित भाव से रूपा पूछ बैठी है . उसके इस प्रश्न पर वहाँ मौजूद सब ठहाका लगाकर हँस पड़े.
मोहतरमा रूपा जी ! लगता है आप मुझे नहीं पहचानी. इधर तपाक से संजय बोल पड़ा है . फिर भी दिमाग को जोर दे रही . दिमाग खाली खाली बता रहा .
लेकिन मुझे याद नहीं कि कब आपसे मिली और कहाँ . चलिए कोई बात नहीं!
आपकी स्मरण शक्ति को याद दिला देता हूँ . जबलपुर में मिले थे हम एक शादी में. जिसमें आप भी शामिल थीं, जिस सहेली की शादी में आयी थीं आप . वो मेरे जिगरी दोस्त की वाइफ है और उनके शादी में किए गए आपके नृत्य ने जो कयामत बरपाया था . अभी तक याद है मुझे .आपकी ठुमकती बलखाती अदा ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी थी । आपकी मनमोहिनी रूप पे आसक्त हूँ रूपा जी और आपकी सहेली से आपके घर का पता लगाया है मैंने. आज आपके सामने अपने प्यार के लिए आया हूँ .
सब कुछ सुनकर रूपा को बिश्वास ही नहीं हो रहा कि कोई उसके साँवले सलोने मुखड़े पर फिदा है . रोमांचित हो उठी है रूपा . आज उसके रूप और गुण दोनों की जीत सुनिश्चित हुई है।
-अंजूओझा
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