दरियादिली

   अजी ! का टुकूर टुकूर ताक रहे हो कभी हमको देखे नहीं का . जैसे जैसे बुढ़ा रहे हो वैसे ही सठिया रहे हो ..अरे नहीं लाजो अपनी टूनटून बीबी को निहार रहे हैं . भले तेरे शरीर में मोटी चर्बी चढ़ गई हो पर अभी भी तुम मेरे लिए हेमा मालिनी हो . का समझी तुम. अतिरेक प्रेम में अभिभूत श्यामजी  वर्मन बोल पड़े . उनकी प्यार की रस भरी बातों को सुन लाजो जी लजा के गठरी बन जाती हैं व उनके गाल सुर्ख गुलाब जैसे लाल हो गए।

उनके घर के आंगन में दोनों अपने आप में मग्न मस्त प्रेमालाप कर रहे . आंगन के बगल में बने रसोईघर घर में उनकी दोनों बहुएं सास ससुर की हँसी ठिठोली से कोफ्त खा रही है . बड़की चिढ़कर कह रही  छूटकी से . देखो ना ! दोनों को अपने उमर का तनिक भी ख्याल  नहीं . इस बुढ़ापे में भगवान का भजन कीर्तन करना चाहिए ना .

बल्कि  इनको मुहब्बत का रंग चढ़ रहा है बुढ़ी को  देखो ना कैसी इतरा रही है , बुढ़ऊ खींसे निपोर रहे .सही बोली जीजी आप .  दोनों बहूएं सास ससुर को कोसने लगी .  सास ससुर  बेशरम हैं वगैरह वगैरह।

श्याम जी और लाजो जी नेकदिल दंपति हैं . दोनों बेटा स्थानीय कार्यालय में काम करते हैं . बड़ा बेटा सचिवालय में अधिकारी है व छोटा बैंक में पी ओ है . इनका संयुक्त परिवार है दो बेटा बहूएं चार बच्चे दो पोता दो पोती .  पटना का संपन्न परिवार है पैतृक घर है। इसलिए घर के  भीतर आंगन है जो आजकल मिलना दुर्लभ है क्योंकि अपार्टमेंट में फ्लैट सिस्टम है जिसमें केवल छोटी सी चार फुट की बालकनी होती है ।

सुबह सुबह घर का माली भागा  चला आता है .  श्याम जी के समक्ष हाथ जोड़ विनती कर रहा . मालिक मेरी बेटी की शादी कट जाएगी . लड़का का पिता दो चाख नकदी , एक हीरो होंडा मोटरसाइकिल,  पलंग गद्दा  ,बर्तन मांगे हैं .. का करें मालिक सवा लाख रूपया घट रहा है . किसके पास जाएं . आपके अलावा और कोई ना सूझा मुझे! कहते हुए फफक कर रो पड़ा माली ।

ओह !  शांत हो जाओ रामू . उसके कंधे पर स्नेहपूर्वक हाथ रखते हुए  श्याम जी सांत्वना बंधाते हैं , तसल्ली रखो तुम. सब अच्छा होगा . तुम्हारी बिटिया हमारी बिटिया जैसी है . कुटूंब को फोन लगाओ .अभी बात करते हैं और मामला को सलटा देते हैं . ठीक है ना ! चूंकि श्याम शरण वर्मन पटना में हाई कोर्ट के जज रह चूके थे सैकड़ों मामलों का निपटारा चुटकी में कर दिया करते थे , न्यायप्रिय व सज्जन व्यक्ति हैं श्याम जी ।

ना ना मालिक ! कतई  कुटूंब से कुछ ना कहें आप  . आप मेरी मदद कर दीजिए.  हर महीने  मेरे पगार में से काट लीजिएगा . एकदम से रामू घबरा गया है . कहीं कुछ कहने से विवाह कट ना जाए।

अच्छा ठीक है तुम्हारी बेटी की शादी यहीं मेरे घर से होगी और  बाकी के सारे खर्च  मैं उठा लूंगा .  यह सुनते ही रामू  अतिरेक खुशी से रो पड़ा है  आप पुण्यात्मा हैं मालिक श्याम जी की आँखों के कोर भींग गए हैं. भींगे स्वर में बोल पड़े हैं कि रामू तुम नहीं जानते कि बेटी का दर्द क्या होता है . मेरी भी बेटी है . जो यहाँ से हजार किलोमीटर दूर दिल्ली में है कभी कभार साल में एक बार आती है वो भी हफ्ता दस दिन के लिए. 

बरखुदार ! बेटी  की शादी करना या करवाना हमारे लिए यज्ञ कराने जैसा है .इसलिए जाओ  बेटी के विवाह की तैयारी करो ।

रामू खुशी से अपना झोली भर चला जाता है . वहीं पर बैठी लाजो जी अपने पति की दरियादिली पर मुस्कुरा पड़ी हैं . वाह जी वाह ! आपने एक गरीब की इज्जत का मान रख लिया है . अच्छा किए आप ।

श्याम जी भी  यह सब सोचकर आनंदित हैं कि विवाह की तैयारी व कार्यक्रम को कैसे कैसे करना है मानों अपनी ही बेटी का कर रहे हों ।

बेटे बहू खुन्नस खाए बैठे हैं कि उनके पिता पानी में पैसा बहा रहे .  सोच सोच कर अंदर अंदर ही चिढ़ रहे कि  माली को स्पष्ट मना कर देते लेकिन इनको तो महान बनने का शौक है ।

अच्छी तरह से जानते हैं दोनों बेटे  ... कि पापा अपनी कमाई अच्छे कामों में लगाते आ  रहे हैं इसलिए दोनों अपना मुंडी भी पटक देंगे  तो भी टस से मस नहीं होंगे पापा . इसलिए चुप रहने में ही भलाई है।

अंजूओझा


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