अदिति की शादी को अभी चार ही दिन हुए थे| सुबह पांच बजे उठ कर अपने पति नीलेश के साथ अपनी ननद और नन्दोई को एयरपोर्ट छोड़ कर आई थी, इसलिए घर वापिस आ कर वो दोनों सो गए| अभी आठ ही बजे थे, अदिति उठ कर नहाने जा ही रही थी, तो नीलेश ने उस से कहा "अभी थोड़ी देर और सो जाओ, जल्दी उठने की वजह से नींद पूरी नहीं हुई होगी"|
तभी उनके कमरे के बाहर से नीलेश की मम्मी सुधा जी की कड़कती हुई आवाज़ आई "नीलेश क्या तुम्हारी ही अनोखी शादी हुई है, जो अदिति अभी तक तैयार हो कर बाहर नहीं आई"?
अदिति उनकी आवाज़ सुन कर घबरा गई और जल्दी-जल्दी तैयार होने लगी| साड़ी पहनने की आदत तो थी नहीं इसलिए उसे साड़ी पहनने में भी समय लग गया| नौ बजे के करीब जब वो कमरे से बाहर गई, तो सुधा जी का तो मुंह ही फूला हुआ था| अदिति ने साड़ी का पल्ला ठीक से संभालते हुए सबके पैर छुए, तो सुधा जी ने कहा "पूजा की सभी तैयारी कर के रसोई में आ जाओ और नाश्ता बनवाने में मेरी मदद करो"|
अदिति मन ही मन सोच रही थी "चार दिन में ही मेरी ज़िन्दगी कैसी उलट गई है, जहाँ शादी से पहले किस को कहाँ से लाना है, कहाँ छोड़ कर आना है, सब मम्मी-पापा देखते थे पर अब उसे सुबह-सुबह उठ कर एयरपोर्ट अपनी ननद को छोड़ने जाना पड़ा| शादी से पहले आराम से दस बजे तक उठने पर भी कोई कुछ नहीं बोलता था पर अब तो आठ बजे ही कमरे के बाहर देर से उठने का ताना मिल गया| शादी से पहले कुछ भी पहनो कोई रोक-टोक नहीं थी| दो-चार बार कभी साड़ी पहनी भी तो घर आने पर मम्मी कहती थी "जल्दी से साड़ी बदल कर रिलैक्स हो जा, इतनी देर से साड़ी संभालते-संभालते थक गई होगी|" पर यहाँ तो सुबह से रात तक बिल्कुल साड़ी में लिपटे-लिपटे सारे काम करो| जहाँ शादी से पहले पैर छूने पर सब कहते थे "तू तो इस घर की लक्ष्मी है, लक्ष्मी से पैर नहीं छुआते" पर अब अगर गलती से भी किसी के पैर नहीं छुए तो "माँ-बाप ने यही संस्कार दिए हैं" सुनने को मिल जायेगा|
पूजा करने के लिए भी कोई कायदे-कानून नहीं थे, जल्दी-जल्दी में चाहे दूर से ही भगवान को हाथ जोड़ दो पर अब तो पूरी संस्कारी बहु की तरह पूजा की पूरी तैयारी करो और फिर सबके साथ मिल कर आरती करो, उससे पहले कुछ खाने को भी नहीं मिलेगा और वहां तो सुबह उठते ही मोबाइल हाथ में लेकर बैठ जाओ और मम्मी से नाश्ते की फरमाईश कर दो| अब यहाँ पहले सबके लिए नाश्ता बनाओ फिर सबको खिलाओ और आखिर में अपना नाश्ता खाओ|
अदिति ने अपना सर पकड़ कर सोचा "ये ससुराल है या हॉस्टल? हे भगवान कैसे रहूंगी इतने कायदे-कानून के साथ|"
दोस्तों, शादी के बाद एक लड़की की ज़िन्दगी पूरी तरह बदल जाती है| जहाँ शादी से एक दिन पहले तक उसे बिलकुल बच्ची समझा जाता है, वहीं शादी के अगले दिन से ही उसे बिलकुल समझदार बनना पड़ता है और बहुत सारी ज़िम्मेदारियाँ संभालनी पड़ती है|
मुझे लगता है, कुछ समय तो मिलना चाहिए, नई-नई बहु को अपने आप को बदलने के लिए….
- Renu Poddar
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