त्यौहार तो तुम्हारा भी है ना बहु

  नैना आज मायके के आंगन को छोड़ कर ससुराल में आ गई थी बहुत ही प्यार और सम्मान के साथ आरती उतार कर सास लक्ष्मीजी ‌ने उसका स्वागत किया। पीछे पीछे  जेठानी भी नजर उतार रही थी अपने देवर देवरानी की। नैना सोच रही थी मम्मी जी तो उम्र में काफी बडी लगती है फिर भी कैसे दौड दौड कर सब काम कर रही हैं। फिर याद आया कि उसके पति अजय ने उसे बताया था कि मम्मी जी को संतान प्राप्ति काफी लेट हो पाई थी।

        खैर शादी के बाद का सुहाना सफर शुरू होते ही वह समझ गई कि वह एक बहुत ही अच्छे परिवार का हिस्सा बन गई है। मम्मी जी और पापाजी अपनी बहुओं में बेटी ढुढते है। उम्र में बहुत बड़ी होने के कारण मम्मी जी काम में ज्यादा मदद नहीं कर पाती हैं परंतु अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती है की बहूओ को कोई परेशानी ना हो फिर चाहे वह उनके आराम की बात हो घूमने के बात हो या फिर पहनने ओढ़ने की।

       नैना की शादी के बाद पहली दीपावली आने वाली थी नैना और उसकी जेठानी आज बैठकर यही बातें कर रहे थे कि हम बस 20 दिन बाकी बचे हैं तो दिवाली की सफाई शुरू कर देते हैं फिर सजावट का काम भी होगा और पकवान भी बनेंगे।

         तभी जेठानी जी की के मायके से फोन आता है कि उनकी मम्मी का एक्सीडेंट हो गया है यह सुनते ही मम्मी जी जेठानी जी को कहती है।

          "तुम जल्दी से जल्दी अपना बैग पैक करो और मायके चली जाओ"

           "पर मम्मी जी दिवाली सर पर है नैना अकेले कैसे कर पाएंगी।"

            "तुम उसकी चिंता मत करो मैं हूं ना हम सब संभाल लेंगे वह सब कुछ बाद में देखेंगे कि क्या करना है कैसे करना है।"

            मम्मी जी ने जेठानी जी को समझा-बुझाकर उनके मायके भेज दिया जेठानी जी तो चली गई पर अब वाकई में नैना को टेंशन हो रही थी कि इतने कम समय में वह अकेले पूरे घर की साफ-सफाई कैसे कर पाएंगी उसके बाद पकवान बनाना और तो और उसका पहला त्यौहार था यहां के रीति रिवाजों के बारे में उसे कुछ भी पता नहीं था।

          अगली सुबह मम्मी जी ने नैना को समझा दिया कि आज से सफाई शुरू करनी है तो सबसे पहले तुम होंल से शुरुआत करो।

          "ठीक है मम्मी जी पहले नाश्ता तैयार कर लु फिर सफ़ाई शुरू करती हुं।"

           "एक बात बता तू क्या इंसान नहीं है तुम क्या थकती नहीं जो पहले रसोई का काम करेगी फिर पूरे हॉल की सफाई करेगी फिर वापस आकर खाना बनायेंगी। चल हट एक काम कर मेरे साथ रसोई में चल सारा सामान मुझे निकाल कर दे दे अब तुझे पता है मेरी टांगों में इतना दम तो है नहीं कि मैं तेरी तरह खड़े-खड़े सब काम कर सकूं मुझे तो गैस नीचे रख कर दे सारा सामान उतार कर दे आज रसोई का काम मैं संभाल लूंगी।  तू बस साफ सफाई करना समझी।  आज मेरे हाथ की गर्म गर्म रोटी खाकर देखना।"

         "मम्मी जी रहने दीजिए मैं कर लूंगी"

          "बेटा हम हर बार इसी तरीके से काम करते हैं तो तू चिंता मत कर और हां एक दिन काम करेंगे और 1 दिन आराम करेंगे और कोशिश यही करेंगे कि दिवाली से 4 दिन पहले तक हमारा सारा काम हो जाए ताकि 4 दिन थोड़ा आराम करेंगे तो चेहरे में चमक आ जाएगी समझी और हां तू वो पार्लर भी तो जाएगी ना।"

           "थैंक्यू मम्मी जी आप हमारे बारे में कितना सोचती हैं।"

            "क्यों न सोचो भाई दिवाली पर लक्ष्मी की पूजा होती है और अगर मेरी लक्ष्मी खुश नहीं होगी मुरझाई हुई होगी तो फिर देवी लक्ष्मी कैसे मुझ पर खुश होंगी। और बेटा यह त्यौहार है इसमें सब खुश रहें तभी अच्छा लगता है सबका मन खुश होना बहुत जरूरी है समझी त्यौहार तो तुम बहू का भी आता है ना तुम्हें भी तो खुश होने का हक है आखिर

          त्यौहार तो तुम्हारा भी है ना बहू।

Ruchika Khatri


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