आज नेहा बहुत उत्साहित थी।वह अपनी शादी के सिलसिले में अपने माता-पिता से अपने दोस्त मयंक और उसके माता-पिता से मिलवाने वाली थी।नेहा उच्च शिक्षित आत्मनिर्भर लड़की थी।मयंक उसके ही दफ्तर में काम करता था।दोनों एक-दूसरे को पसन्द करने लगें।कुछ दिनों पहले ही दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया था।
मयंक अपने माता-पिता के साथ नेहा के घर आया।औपचारिक बातचीत के बाद मयंक के माता-पिता ने घुमा-फिराकर मोटे दहेज की माँग रखी तथा अपनी शर्तों पर नेहा को बहू बनाने को तैयार हुए।मयंक मूक सहमति के साथ माता-पिता की हाँ-में-हाँ मिला रहा था।
अपनी काबिल बेटी के लिए मोटे दहेज की माँग और मयंक की खामोशी देखकर नेहा के माता-पिता का खून खौल उठा।नेहा भी मयंक के दोगलेपन से स्तंभित रह गई। नेहा ने मयंक से बाद में निर्णय सुनाने को कहकर उससे सदा के लिए रिश्ता तोड़ लिया।नेहा के माता-पिता ने भी अपनी बेटी को दहेज -लोलुप के चंगुल से बच निकलने पर राहत की साँस लीं।
समाप्त।
लेखिका-डाॅक्टर संजु झा(स्वरचित)
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