सातारा रोड पर बने भव्य 'रॉयल हेरिटेज' बैंक्वेट हॉल के मुख्य द्वार पर फूलों की सजावट देखते ही बनती थी। आज शहर के जाने-माने उद्योगपति रायसाहब की इकलौती बेटी, तानिया की सगाई थी। लड़का, आकाश खुराना, एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में वीपी था और देखने में किसी मॉडल से कम नहीं लगता था। दोनों परिवारों के बीच खुशी का माहौल था, लेकिन तानिया के मन में एक अजीब सी बेचैनी थी।
तानिया अपने कमरे में तैयार हो रही थी। उसकी मेकअप आर्टिस्ट, सिमी, उसके बालों में आखिरी पिन लगा रही थी।
"मैम, आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं। आकाश सर तो आज आपको देखते ही रह जाएंगे," सिमी ने चहकते हुए कहा।
तानिया फीका सा मुस्कुरा दी। उसकी नज़र बार-बार अपने फोन पर जा रही थी। कल रात उसे एक अज्ञात नंबर से कुछ तस्वीरें और एक वॉइस नोट मिला था। उन तस्वीरों ने उसकी रातों की नींद उड़ा दी थी। वह आकाश को पिछले छह महीनों से जानती थी, लेकिन यह रिश्ता अरेंज्ड था। आकाश का व्यवहार हमेशा नपा-तुला और बेहद शिष्ट रहा था। पर कल रात का वह मैसेज... क्या वह सच था या किसी की शरारत?
तभी कमरे का दरवाज़ा नॉक हुआ। तानिया की माँ, सुमित्रा जी अंदर आईं।
"अरे बेटा, अभी तक तैयार नहीं हुई? नीचे महूरत का समय हो रहा है। आकाश और उसके मम्मी-पापा आ चुके हैं। चलो जल्दी," उन्होंने हड़बड़ी में कहा।
तानिया ने एक गहरी सांस ली। उसने अपना क्लच उठाया, जिसमें उसका फोन था, और माँ के साथ नीचे चल दी। सीढ़ियों से उतरते हुए उसकी नज़रें सीधे स्टेज पर खड़े आकाश पर गईं। शेरवानी में सजा आकाश सचमुच राजकुमार लग रहा था। उसके चेहरे पर विजय और आत्मविश्वास की मुस्कान थी।
जैसे ही तानिया स्टेज पर पहुँची, फोटोग्राफर्स के कैमरों की फ्लैश चमकने लगी। आकाश ने अपना हाथ आगे बढ़ाया, "तुम बहुत प्यारी लग रही हो, तानिया।"
तानिया ने उसके हाथ को छुआ। वह हाथ ठंडा था, या शायद तानिया का अपना शरीर डर और गुस्से से कांप रहा था। रस्म शुरू होने वाली थी। पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे। रायसाहब ने माइक हाथ में लिया।
"देवियों और सज्जनों, आज मेरी बेटी की ज़िंदगी का सबसे अहम दिन है। मैं खुराना परिवार का स्वागत करता हूँ..."
अभी रायसाहब बोल ही रहे थे कि हॉल के प्रवेश द्वार पर कुछ शोर हुआ। सिक्योरिटी गार्ड्स किसी को रोकने की कोशिश कर रहे थे। एक साधारण सी सलवार-कमीज पहने, बिखरे बालों वाली लड़की गार्ड्स से उलझ रही थी।
"मुझे अंदर जाने दो! मुझे आकाश से बात करनी है!" वह लड़की चिल्ला रही थी।
संगीत रुक गया। मेहमानों की कानाफूसी शुरू हो गई। आकाश का चेहरा, जो अभी तक चमक रहा था, अचानक सफेद पड़ गया। उसने अपनी माँ की तरफ देखा।
तानिया ने वह शोर सुना। वह जानती थी कि यह वही पल है। उसने अपने पिता के हाथ से माइक ले लिया।
"पापा, रुकिए। उन गार्ड्स से कहिए उसे आने दें।"
"तानिया? तुम क्या कर रही हो? कौन है वो?" रायसाहब ने घबराकर पूछा।
"आने दीजिए पापा। शायद आज की शाम का सबसे ज़रूरी मेहमान वही है," तानिया की आवाज़ में एक अजीब सी दृढ़ता थी।
गार्ड्स हट गए। वह लड़की, जिसका नाम कावेरी था, डगमगाते कदमों से स्टेज की तरफ बढ़ी। उसकी गोद में एक साल का बच्चा था, जो सहम कर अपनी माँ से चिपका हुआ था। कावेरी की आँखों में आंसू थे, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा गुस्सा था।
आकाश ने आगे बढ़कर उसे रोकने की कोशिश की, "तुम? तुम यहाँ क्या कर रही हो? गार्ड्स! इसे बाहर निकालो। यह औरत पागल है, यह मुझे ब्लैकमेल कर रही है!" आकाश चिल्लाया।
"ब्लैकमेल?" तानिया ने बीच में टोकते हुए कहा। उसने अपना फोन निकाला और उसे बैंक्वेट हॉल के बड़े प्रोजेक्टर से कनेक्ट कर दिया, जो अब तक प्री-वेडिंग शूट की तस्वीरें दिखा रहा था।
अगले ही पल, स्क्रीन पर आकाश और कावेरी की शादी की तस्वीरें थीं। मंदिर में ली गई तस्वीरें, कोर्ट मैरिज का सर्टिफिकेट, और बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र की कॉपी। पूरा हॉल सन्न रह गया।
तानिया ने माइक कावेरी की ओर बढ़ा दिया। "बताइए कावेरी जी, आकाश कह रहे हैं कि आप पागल हैं।"
कावेरी ने कांपते हुए माइक लिया। उसने आकाश की ओर देखा, जिसकी नज़रें अब झुकी हुई थीं।
"पागल ही तो थी मैं," कावेरी ने रुंधे गले से कहा। "पाँच साल... पाँच साल मैंने इस आदमी को अपनी ज़िंदगी दी। जब इसके पास नौकरी नहीं थी, तब मैंने ट्यूशन पढ़ाकर इसका खर्चा उठाया। हमने मंदिर में शादी की, फिर कोर्ट में। इसने कहा था कि जैसे ही इसे अच्छी नौकरी मिलेगी, यह अपने घर वालों को बता देगा। लेकिन नौकरी मिलने के बाद इसकी भूख बढ़ गई। इसे अब एक अमीर बाप की बेटी चाहिए थी, ताकि यह अपना स्टार्टअप शुरू कर सके।"
कावेरी ने अपनी गोद में लिए बच्चे की ओर इशारा किया, "यह अंश है, आकाश का बेटा। पिछले महीने तक यह हमारे साथ रहता था, और आज यह यहाँ दूसरी शादी रचाने आया है। इसने मुझसे कहा कि इसे कंपनी के काम से विदेश जाना है। अगर मुझे कल रात तानिया जी का मैसेज नहीं आता कि आज सगाई है, तो मैं शायद अब भी इसके लौटने का इंतज़ार कर रही होती।"
हॉल में इतना सन्नाटा था कि सुई गिरने की आवाज़ भी सुनाई दे। खुराना साहब (आकाश के पिता) अपनी जगह पर पत्थर की मूरत बने बैठे थे। उनकी पत्नी शर्म से गड़ गई थीं।
आकाश अब भी हार मानने को तैयार नहीं था। वह तानिया की तरफ मुड़ा, "तानिया, यह सब झूठ है। यह तस्वीरें मॉर्फ्ड हैं। यह औरत मुझे फंसा रही है। तुम मुझ पर भरोसा करो, मैं सिर्फ तुमसे प्यार करता हूँ।"
तानिया ने एक कड़वी मुस्कान के साथ उसे देखा। "आकाश, झूठ के पाँव नहीं होते, लेकिन तुम्हारे झूठ के तो पंख थे जो आज कट गए। कल रात जब मुझे अनजान नंबर से तस्वीरें मिली थीं, तो मैंने तुरंत कावेरी जी से संपर्क किया था। मैं उस तरह की लड़की नहीं हूँ जो आंख मूंदकर रिश्तों में बंध जाए। मैंने पूरी पड़ताल की। तुम प्यार मुझसे नहीं, मेरे पापा के पैसों से करते हो।"
तानिया ने अपनी उंगली से वह अंगूठी निकाली जो आकाश ने उसे शगुन में दी थी और उसे आकाश के मुंह पर दे मारा।
"अपने इस ढोंग को समेट लो आकाश। और शुक्र मनाओ कि मैंने पुलिस नहीं बुलाई। धोखाधड़ी और बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने के जुर्म में तुम अभी जेल जा सकते हो।"
रायसाहब का चेहरा गुस्से से लाल हो गया था। वे आगे बढ़े और उन्होंने आकाश के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया।
"निकल जाओ यहाँ से! इससे पहले कि मैं तुम्हें धक्के मारकर बाहर निकलवाऊं।"
लेकिन तभी एक भारी आवाज़ गूंजी, "रुकिए!"
यह आवाज़ आकाश के पिता, दीनदयाल खुराना की थी। वे एक पुराने और सिद्धांतों वाले व्यक्ति माने जाते थे, लेकिन बेटे के मोह में अंधे हो गए थे। आज उनकी आंखों से वह पट्टी उतर चुकी थी। वे धीरे-धीरे चलते हुए स्टेज पर चढ़े। उन्होंने कावेरी के सामने हाथ जोड़े।
"बेटी, मुझे माफ़ कर दो। हमने परवरिश में ही शायद कोई कमी छोड़ दी थी जो हमारा खून इतना गंदा निकला। हमें यह तो पता था कि आकाश का किसी लड़की के साथ चक्कर है, लेकिन उसने हमसे कहा था कि वह लड़की उसे परेशान कर रही है और वह रिश्ता खत्म हो चुका है। हमें नहीं पता था कि तुम उसकी ब्याहता पत्नी हो और यह..." उन्होंने बच्चे की ओर देखा, "...यह हमारे खानदान का वारिस है।"
दीनदयाल जी ने मुड़कर आकाश को देखा, उनकी आँखों में अंगारे थे। "तूने आज मेरी पगड़ी उछाल दी आकाश। दौलत की भूख ने तुझे अंधा कर दिया? तू अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़कर यहाँ व्यापार करने आया था?"
आकाश गिड़गिड़ाने लगा, "पापा, मेरी बात सुनिए, वो तो बस..."
"चुप!" दीनदयाल जी गरजे। "एक शब्द और नहीं। रायसाहब, मैं आपसे माफ़ी मांगता हूँ। आपकी बेटी ने आज हमें बहुत बड़े पाप से बचा लिया। तानिया बेटी, तुम्हारा यह एहसान हम कभी नहीं भूलेंगे।"
फिर दीनदयाल जी ने कावेरी के सिर पर हाथ रखा। "आज से तुम सिर्फ आकाश की पत्नी नहीं, मेरी बेटी हो। यह घर, यह संपत्ति, सब पर तुम्हारा और इस बच्चे का हक़ है। आकाश को अगर इस परिवार में रहना है, तो उसे तुम्हारे पैरों में गिरकर माफ़ी मांगनी होगी और तुम्हें पूरे मान-सम्मान के साथ स्वीकार करना होगा। वरना मैं इसे आज ही अपनी जायदाद से बेदखल कर दूंगा।"
आकाश जानता था कि उसके पिता खोखली धमकियां नहीं देते। उसका सारा खेल बिगड़ चुका था। तानिया का पैसा तो गया ही, अब पिता की जायदाद भी हाथ से जाती दिख रही थी। वह घुटनों के बल बैठ गया, क्या सच में उसे पछतावा था या यह भी एक नाटक था, यह कहना मुश्किल था। लेकिन कावेरी की आँखों में अब डर नहीं था। उसे उसका हक़ मिल चुका था।
तानिया अपनी माँ के पास गई। सुमित्रा जी ने बेटी को गले लगा लिया।
"तूने बहुत हिम्मत का काम किया बेटा। कोई और होती तो शायद बदनामी के डर से चुप रह जाती," सुमित्रा जी ने कहा।
तानिया मुस्कुराई, "माँ, बदनामी उसकी होनी चाहिए जो गलत करे, उसकी नहीं जो सच का साथ दे। अगर मैं आज चुप रहती, तो एक औरत की ज़िंदगी बर्बाद होती और मेरी ज़िंदगी नर्क बन जाती। मैंने बस वही किया जो सही था।"
कावेरी ने तानिया के पास आकर उसके हाथ पकड़ लिए। "दीदी, आपने मुझे मेरी पहचान लौटा दी। मैं आपकी यह ऋणी ज़िंदगी भर रहूँगी।"
तानिया ने कावेरी के बच्चे के गाल को छूते हुए कहा, "तुम्हें किसी का ऋणी होने की ज़रूरत नहीं है कावेरी। अपना हक़ मांगना कोई गुनाह नहीं है। बस वादा करो, इस बच्चे को कभी उसके पिता जैसा मत बनने देना। इसे एक ऐसा इंसान बनाना जो औरतों की इज़्ज़त करना जाने।"
मेहमान जो तमाशा देखने के लिए रुके थे, अब तानिया की तारीफ कर रहे थे। जिस 'रॉयल हेरिटेज' में एक झूठा रिश्ता जुड़ने वाला था, वहां एक सच की जीत हुई थी।
दीनदयाल जी ने उसी मंडप में, उसी मुहूर्त पर, पंडित जी से कहा, "पंडित जी, सगाई तो टूट गई, लेकिन आप एक छोटा सा हवन करवा दीजिए। मेरी बहू और पोता आज पहली बार सबके सामने आए हैं। मैं चाहता हूँ कि गृह-प्रवेश से पहले अग्नि को साक्षी मानकर मेरा बेटा अपनी पत्नी को दोबारा स्वीकार करे और अपनी गलतियों का प्रायश्चित करे।"
आकाश ने कावेरी को माला पहनाई। उसके चेहरे पर शर्मिंदगी थी, और कावेरी के चेहरे पर एक कठोर संतोष। वह जानती थी कि आगे की राह आसान नहीं होगी, आकाश को सुधरने में वक्त लगेगा, लेकिन अब उसके साथ उसके ससुर और उसका अपना आत्मसम्मान खड़ा था।
तानिया दूर खड़ी यह सब देख रही थी। उसकी सगाई टूट चुकी थी, उंगली खाली थी, लेकिन उसका दिल भरा हुआ था। उसने आज एक घर उजड़ने से बचाया था। रायसाहब ने बेटी के कंधे पर हाथ रखा, "चलो बेटा, घर चलते हैं। आज मुझे गर्व है कि तुम मेरी बेटी हो।"
तानिया ने पलटकर बैंक्वेट हॉल को देखा। वहां अब शहनाई की आवाज़ में एक सुकून था। कभी-कभी कुछ रिश्तों का टूटना ही दूसरे रिश्तों को सही मायने देता है। वह खाली हाथ लौटी जरूर, लेकिन अपने साथ अपनी गरिमा और एक दूसरी स्त्री की दुआएं लेकर। और शायद, यह किसी भी हीरे की अंगूठी से कहीं ज़्यादा कीमती था।
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