ईर्ष्या के ज़ख्म

 अभी मेरे दिल के ज़ख्म भरे नहीं है ...शादी के बाद जब से ससुराल आई हूं जेठानी ...निधि भाभी के गुणगान सुन सुन कर फफोले से बन गए हैं....."अरे कुसुम सब्जी तुमने बहुत अच्छी बनाई है पर बड़ी बहू निधि के हाथ तो कमाल हैं.....कुसुम तुम दिन भर घर में करती क्या रहती हो एक काम ढंग से नहीं कर पाती हो बड़ी भाभी को देखो नौकरी भी करती हैं और घर के भी सभी काम सलीके से करती हैं...मां तुम रहने दो बड़ी मम्मी पैरेंट टीचर मीटिंग में हमारे स्कूल चली जायेंगी....!

हर बात पर खुद से एक साल ही बड़ी निधि भाभी की तारीफ ....उनसे तुलना... कुसुम के ईर्ष्या दग्ध दिल पर अनजाने ही अनगिनत ज़ख्म बनाते चले गए

जिन पर थोड़ा सा मलहम उस दिन लगा था जिस दिन निधि भाभी के दो जुड़वां लड़कियां रिद्धि सिद्धि हुई थीं और कुसुम के जुड़वां लड़के शिव शक्ति!!...

निधि भाभी जितनी भी अच्छी दुलारी हों लेकिन उनके तो दोनो लड़कियां ही है और मै उनकी तुलना में कितनी भी खराब क्यों ना हूं पर मेरे दो दो बेटे हैं  ...खानदान का उद्धार तो मेरे बेटे ही करेंगे....देख लेना लड़कियों की शादी में लड़के वालों का करते करते एड़ी रगड़ने में भाभी का सिर कैसे नीचे हो जायेगा पूरी जिंदगी बीत जायेगी इनकी....और मैं ठाट बाट से बेटे बहू का सुख भोगूंगी ....कुसुम अपनी मां से फोन पर अपने दिल के जलन कुढ़न भरे जख्मों पर अपनी ही भतीजियों  के अंधकार पूर्ण भविष्य की मधुर कल्पना रूपी मलहम लगाने में मगन थी।

मां मां कहां हो सुना तुमने .... बेटा शिव तेजी से आकर बोला खुशी से उत्तेजित था वो ।

क्या है कुछ बोल भी...कुसुम के पूछते ही बेटा चहक उठा....

"मां रिद्धि सिद्धि दोनों का सिविल सेवा में चयन हो गया है

जल्दी आओ बड़ी मम्मी तुम्हे बुला रही हैं देखो नेता विधायक मीडिया कितनी भीड़ लगी है आज हमारे घर में....सब बड़ी मम्मी को श्रेय दे रहे  हैं खानदान का नाम रोशन कर दिया कह रहे हैं..!

और तुम लोगों  रिजल्ट क्या रहा !!तेज नमक की पीड़ा अनुभव करती कुसुम ने पूछा था।


हमने तो तैयारी ही नहीं की थी मां बताया तो था पेपर बिगड़ गया है...!कुसुम के ज़ख्मों पर और तेज नमक छिड़कता शिव अपने भाईशक्ति के साथ हंसता हुआ बाहर भाग गया था।

आपसी ईर्ष्या जलन से खुद ही बनाए अपने जख्मों में बिंधी हुई कुसुम को आज खुद अपना भविष्य अंधकार पूर्ण दिख रहा था।


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