बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होये

     अचानक पड़े छापे, इ डी, सी बी आई  का रेड... प्रसाद साहेब  को अपना काली कमाई से अर्जित अकूत संपत्ति का साम्राज्य धन-दौलत  आलीशान भवन छिन्न-भिन्न होता दिखाई दिया। मगर वे  इतनी आसानी से  हार मानने वालों में  से नहीं थे। आखिर चुनावों में विभिन्न पार्टियों को इतना फंड मुहैय्या कराते हैं। 

अपने उपरवालों को  गड्डी गड्डी नोट पहुंचाते हैं ताकि अपना काला कारोबार सहजता पूर्वक कर सके। 

    कोयला, सड़क ,बालू ,रेत,सीमेंट सभी का ठेका इनके पास।

 बेटा बेटी महंगे शिक्षण संस्थानों में पिता के अवैध कमाई  रसूख पर ऐश करते हैं। पत्नी की नफासत तुनुकमिजाजी जगजाहिर थी।

  उन्होंने फोन निकाल कर अपने आकाओ से मदद मांगनी चाही कि पुलिस अफसर ने हाथ से मोबाइल छीन लिया, "अब आपका खेल खतम हुआ... यू आर अंडर अरेस्ट। "

    पुलिस के गिरफ्त में आते ही प्रसाद जी घिघिया उठे, "मैने सभी को थैला भर-भर कर पहुंचाया...और आज। "

"अपनी सफाई अदालत में देना "सख्ती से कार्रवाई हुई। 

   ताश के पत्ते सा अवैध साम्राज्य ढह गया। पत्नी, बच्चे सड़क पर आ गये। मदद करने  कोई भी सामने नहीं आया। 

लंबी सजा हुई। अब सिर धुनने के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं था, "बोया  पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होये "लोग कहने लगे। 

  मौलिक रचना- डाॅ उर्मिला सिन्हा


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